समसामयिक

विश्वास से परिवर्तन की ओर भविष्य को गढ़ता विज्ञान

हर वर्ष 10 नवंबर को मनाया जाने वाला ‘शांति एवं विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस’ हमें याद दिलाता है कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान विज्ञान की प्रगति और समाज के विश्वास पर आधारित है। यूनेस्को की इस वर्ष…

रेल सुरक्षा : सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?

भारत की रेल पटरियां देश की जीवनरेखा हैं, लेकिन बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं इस तंत्र की सुरक्षा संस्कृति पर गंभीर सवाल उठाती हैं। बिलासपुर के लालखदान में मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में 11 यात्रियों की मौत सिर्फ एक…

कैंसर से बचाव के लिए जागरुकता की जरुरत                 

हर वर्ष 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है, क्योंकि कैंसर भारत सहित विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार भारत में जीवनभर में 11 प्रतिशत लोगों…

बिहार चुनाव : जंगल राज बनाम सरकारी नौकरी की बौछार

बिहार की राजनीति में अपराध, जाति और सत्ता का त्रिकोण लंबे समय से प्रभावी रहा है। “जंगल राज” सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और वर्चस्व के संघर्ष की परतों से जुड़ा शब्द रहा है। आज जब युवा…

मछुआरा महिलाओं का संघर्ष : सवाल जो अब भी अनसुने हैं

विश्व मछुआरा महिला दिवस पर सवाल यही है कि मछुआरा महिलाओं का नेतृत्व, उनकी आवाज़ और उनके संघर्ष आज भी मुख्यधारा के महिला आंदोलनों में जगह क्यों नहीं पाते? समुद्र किनारे खड़ी ये महिलाएं सिर्फ आजीविका नहीं, जाति, श्रम और…

‘स्मार्ट सिटी योजना’ : पूंजी के लिए ‘प्राइवेट पार्टनर’

कुल जमा दस मिनट की बरसात में बाढग्रस्त हो जाने वाले, जल-मल निकासी के बजबजाते गटरों, टूटी-फूटी सडकों और बदहाल जलापूर्ति आदि से बदहवास शहरों को दस साल पहले स्मार्ट बनाने के मंसूबे बांधे गए थे। आज इस कारनामे को…

संसाधन : लूटने को ललचाता लद्दाख

कुछ दिन पहले तक केन्द्र की भाजपा सरकार के लाडले माने जाने वाले सोनम वांगचुक और उनके संगी-साथी अचानक देशद्रोही, विदेशी पूंजी पर पलने वाले और हिंसा भडकाने वाले कैसे और क्यों हो गए? ध्यान से देखें तो सरकारों का…

विविधता में एकता ही सर्वश्रेष्ठ भारत की पहचान

राष्ट्रीय एकता केवल भौगोलिक सीमाओं का मेल नहीं, बल्कि विविधताओं के बीच बंधुत्व, सहिष्णुता और साझा मूल्यों की भावना है, जो भारत को “एकता में अनेकता” का जीवंत उदाहरण बनाती है। सरदार पटेल के एकीकरण से लेकर बाबा आमटे की…

धमाकों से नहीं, दीयों से मनाएं दीवाली का उत्सव

दीवाली खुशियों और उजालों का त्योहार है, पर जब यही रोशनी धुएं और शोर में बदल जाए, तो उसका अर्थ खो जाता है। अत्यधिक पटाखों ने इस पर्व की पवित्रता और सादगी को प्रदूषण के धुंए में ढक दिया है।…

वन अधिकार कानून और वन संरक्षण अधिनियम आदिवासी हितों का पूरक

वनवासियों के आवास अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जिससे वनवासी समुदाय को आवास का…