शिबू सोरेन के निधन के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय रहे सोरेन ने आदिवासी अधिकारों, महाजनी शोषण, शराबबंदी और झारखंड राज्य की मांग को लेकर जीवनभर संघर्ष किया। टुंडी…
मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के वो युगपुरुष हैं, जिनकी लेखनी ने आम आदमी की पीड़ा, सामाजिक कुरीतियों और आज़ादी की भावना को शब्द दिए। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक और लेखों के माध्यम से साहित्य को जन-सरोकारों से जोड़ा और हिन्दी…
अजमेर,15 जुलाई । सामाजिक कार्यकर्ता और मित्र रवि हेमाद्री अब हमारे बीच नहीं रहे। आज सुबह 4:35 बजे, अजमेर के मित्तल अस्पताल की आईसीयू में उन्होंने अंतिम साँस ली। इंदिरा उनके साथ आख़िरी क्षण तक थीं। वे बुखार के चलते…
तिरुवनंतपुरम के निकट नेय्याटिंकारा में होगा सम्मान समारोह तिरुवनंतपुरम, 5 जुलाई। वरिष्ठ गांधीवादी विचारक, लेखक एवं केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष श्री रामचंद्र राही को दूसरे ‘पी. गोपीनाथन नायर पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के अंतर्गत ₹50,000…
स्मृति शेष यदि आप जैसलमेर की किसी भी गली में यह पूछें कि क्या किसी ने गोडावण देखा है, तो जवाब में राधेश्याम विश्नोई Radheshyam Pemani Bishnoi का नाम अवश्य सुनने को मिलेगा। गोडावण, यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड—वह दुर्लभ पक्षी,…
गांधी विचार को मानने वालों में बेहद वरिष्ठ और सम्मानित राधा बहन अपनी देशभर की अनेक जिम्मेदारियों के अलावा बरसों से हिमालय में रहकर उसकी बर्बादी भी देख रही हैं। वे बस भर उन योजनाओं पर उंगली उठाती रहती हैं…
पर्यावरणविद् राजेन्द्र सिंह से कुमार सिद्धार्थ की बातचीत मध्यप्रदेश–राजस्थान की सीमा पर एक आमफहम-सी, साल के अधिकांश समय सूखी रहने वाली नदी थी–सैरनी। यह इलाका डकैती के अलावा भीषण गरीबी की चपेट में है, इतनी गरीबी कि वहां बसी सहरिया…
जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से सक्रिय हैं रंजन पांडा देश के अग्रणी पर्यावरणविदों में से प्रमुख रंजन पांडा, जिन्हें ‘वॉटर मैन ऑफ ओडिशा’ और ‘क्लाइमेट क्रूसेडर’ के रूप में जाना जाता है, को वर्ल्ड…
वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और भारतीय कार्यरत पत्रकार महासंघ (IFWJ) के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे कोटमराजू विक्रम राव का 12 मई 2025 को लखनऊ में 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से श्वसन संबंधी…
संघमित्रा गाडेकर (उमा जी) की चुपचाप हुई विदाई के साथ जैसे एक युग भी विदा हो गया—राजघाट की स्मृतियाँ, सर्वोदय शिविरों की ऊष्मा और खादी में लिपटी उनकी शांत उपस्थिति अब स्मरण में रह गई हैं। वे एक चिकित्सक से…