Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Year: 2022

भोपाल गैस त्रासदी : ज़ख्म अभी भरे नहीं हैं !

‘भोपाल गैस त्रासदी’ के 38 वें साल में, उसके प्रति सरकारों, सेठों और समाज की बेशर्म अनदेखी के अलावा हमें और क्या दिखाई देता है? 1984 की तीन दिसंबर के बाद पैदा हुई पीढी इसे लेकर क्या सोचती है? क्या…

गैस पीड़ितों के विशिष्ट इलाज में विफल भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र (BMHRC)

एक दशक पहले तक जिस भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशिऐलटि अस्पताल के रूप में थी जहाँ बारह से ज्यादा उच्चत्तर चिकित्सा विभागों में कंसल्टेंट कार्यरत रहते थे और आठ बाह्य चिकित्सा यूनिट्स…

यात्रा ने राहुल को चतुर और कांग्रेस को भय-मुक्त बना दिया !

देश-हित में राहुल की यात्रा का योगदान यह माना जा सकता है कि नागरिक सत्तारूढ़ दल और उसके आनुषंगिक संगठनों के उग्रवादी कार्यकर्ताओं से कम डरने लगेंगे। गौर किया जा सकता है कि सांप्रदायिक विद्वेष की घटनाओं में कमी दिखाई…

महिला हिंसा : अपनों को ही कैसे मार डालते हैं लोग

दुनिया भर में जो महिलायें हत्या का शिकार होती हैं, उनमें से चालीस फीसदी की हत्या की जाती है, उनके पूर्व प्रेमियों या पतियों द्वारा. घर महिलाओं के लिए एक खतरनाक युद्धभूमि बन जाता है, जहाँ सबसे अधिक रक्तपात की…

पातालकोट के ‘पीवीटीजी’ : भारिया के बहाने आदिवासी विमर्श

चाहे विधानसभाओं, संसद के चुनाव हों या जगह-जगह जारी समाजसेवा,नक्सलवाद हो या मौजूदा विकास की परियोजनाएं,आदिवासियों के बिना किसी की कोई दाल नहीं गलती। दूसरी तरफ,वे ही आदिवासी सर्वाधिक बदहाली भी भोगते हैं। देशभर में करीब आठ फीसदी आबादी वाली…

भारत जोड़ो यात्रा : सत्ता में क्यों घबराहट है राहुल गांधी की पदचाप से

राहुल जीते जागते सौम्य समझदार गंभीर वृत्ति के मजबूत कद काठी के नेक दिल इंसान है जैसा कि उनसे यात्रा में मिले कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओ का यह अनुभव है। लोग उनसे प्रभावित भी होते है। उनको अपने बीच आम वेशभूषा…

मिट्टी की महिमा के अमर गायक : कवि डॉ.शिवमंगल सिंह सुमन

हिंदी साहित्य की प्रगतिशील विचारधारा के शीर्षस्थ कवि डॉ.शिवमंगल सिंह सुमन के अवसान को दो दशक हो रहे हैं। महाकाल के महिमामय उद्यान के प्रमुख सुमन की सुरभि से कभी उज्जैनी का कण-कण सुवासित होता था। शहर का कोई भी…

म़ीडिया : अगड़ी जातियों की गिरफ्त में म़ीडिया

एक ठीक दर्शक या पाठक की तरह आंख-कान खोलकर देखें तो अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों जैसे तबकों को मीडिया में मिलने वाली नगण्‍य सी जगहें साफ देखी जा सकती हैं। विडंबना यह है कि हमारी कुल आबादी में ये…

आर्थिक विकास : गिरता रुपया, चढ़ता डॉलर

‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ (जेएनयू) से अर्थशास्त्र पढीं देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की इस बात में कितना दम है कि रुपए के गिरने की वजह डॉलर का मजबूत होना है? ध्यान से देखें तो उनकी यह टिप्पणी समूचे अर्थतंत्र को…