समाज

आखिर क्या हैं, बापू की सहज, सरल सीख-सलाहें

तरह-तरह के प्राकृतिक और इंसानी धतकरमों की ‘कृपा’ से दिनों-दिन बदहाल होती दुनिया को बचाने और सही-सलामत रखने की कोशिशें अंतत: महात्मा गांधी के विचारों पर आकर टिकती हैं। आखिर क्या हैं, बापू की सहज, सरल सीख-सलाहें? बता रहे हैं,…

विचार : जड़-मूल से क्रांति चाहिए

126 वां जयंती वर्ष : दादा धर्माधिकारी मनुष्य एक-दूसरे के समीप होते हुए भी एक-दूसरे के साथ जीते नहीं हैं। इसमें चन्द बाधाएं हैं। एक है – मालिकी और मिल्कियत। दूसरा है – संप्रदाय या धर्म। तीसरा – जाति। चौथा…

मुद्दा : जाति-जनगणना की जरूरत

लोक-कल्याणकारी राज्य में नागरिकों को दी जाने वाली सुख-सुविधाएं समाज के विभिन्न तबकों की आबादी, हैसियत और जरूरत के आधार पर तय की जाती हैं, लेकिन यदि सरकार और नीति-निर्धारकों के पास इन तबकों की आबादी का ठीक आंकडा ही…

एक डॉक्टर की डरावनी मौत : इंसानियत से गिरता इंसान 

कोलकाता के ‘राधा-गोविंद कर अस्पताल’ की प्रशिक्षु डॉक्टर की बलात्कार के बाद की गई वीभत्स हत्या ने एक बार फिर समूचे देश को हिला दिया है, लेकिन क्या यह देश-व्यापी उथल-पुथल किसी कारगर नतीजे तक पहुंच पाएगी? क्या हमारी सरकार…

आजाद भारत में विकलांग बच्चों की चुनौतियां

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक विकलांग बच्चों की पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि सरकार ने विकलांग बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की कई योजनाएँ चलाई हैं, लेकिन इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो…

तमिलनाडु : बंदरगाह के विरोध में तमिल किसान

राजनीतिक रूप से भले ही सत्ताधारी दल अलग-अलग दिखाई देते हों, लेकिन विकास के मामले में सभी में गजब की एकरूपता है। तमिलनाडु को ही लें तो वहां उत्तर भारत की भाजपा-कांग्रेस जैसी पार्टियों से सर्वथा भिन्न ‘द्रविड मुनेत्र कषगम’…

साहित्‍य : अंधायुग और कविता की पुकार

चंद्रकांत देवताले समाज के सुख दुख को अपने साहित्‍य में स्‍थान देने वाले यशस्वी कवि चंद्रकांत देवताले ने मूल रूप से हिंदी कविता में बदलाव के पक्षधर रहे हैं। साहित्‍यकार देवताले अपने समय और भविष्य के कवि थे। वे सच…

Gold: सोने की सदारत

सोने से करेंसी की कीमत आंकने के दिन भले ही अब बीत गए हों, लेकिन सोने की चमक अब भी बरकरार है। भारत का सुरक्षित स्वर्ण भंडार के लिहाज से अग्रणी देशों में शामिल होना गौरव की बात है। क्या…

भारत में घुमंतूजन जातियों को संवैधानिक संरक्षण देने की पहल

भारत में घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और गैर-अधिसूचित जनजातियों के संरक्षण और भविष्य की योजनाओँ पर विचार विमर्श की प्रक्रिया चल रही है। गैर-अधिसूचित जनजातियों, घुमंतू जनजातियों और अर्ध-घुमंतू जनजातियों को भी गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। ऐसे समुदायों के…

महात्‍मा गांधी की कला-दृष्टि

राममनोहर लोहिया ने जिन्हें ‘सरकारी’ और ‘मठी’ गांधीवादी कहा था उनमें से अधिकांश ने अपने निजी और सार्वजनिक व्यवहार से गांधी को एक बेहद नीरस, कला विरोधी और मालवी में कहें तो लगभग ‘सूमडा’ की तरह स्थापित किया है। इसके…