ध्यान से देखें तो आज के दौर की समस्याओं, खासकर निजी समस्याओं को आपसी भरोसे के बल पर निपटाया जा सकता है, लेकिन विडंबना है कि इस मामूली बात को कोई समझना नहीं चाहता। कैसे इस भरोसे को पुनर्स्थापित किया…
आजादी के साढ़े सात दशकों बाद भी सीवर-सेप्टिक टेंक की सफाई में जान देते अनेक सफाईकर्मी हमारे विकास का ही मुंह नहीं चिढाते, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने को भी शर्मिंदा करते हैं जिसमें एक तबके को दूसरे की वीभत्स गंदगी…
‘नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो’ हर साल औरतों पर अपराधों की रिपोर्ट जारी करता है, लेकिन इससे प्रेरित होकर कोई कार्रवाई होती नहीं दिखती। विचित्र यह है कि औरतों पर होने वाले अपराधों में उत्तर भारत के राज्य हर बार ‘बाजी’…
‘सिया राममय सब जग जानी…’के इस दौर में एक सवाल यदा-कदा उठता रहता है कि रामायण कोई गल्प है या एक सच्ची, ऐतिहासिक गाथा? कुछ विद्वान शोधार्थियों ने इस पर काम किया है। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की स्थापना के…
एक जमाने में मिशन माना जाने वाला सामाजिक कार्य आजकल एक व्यवसाय का दर्जा हासिल कर चुका है। ऐसे में जाहिर है, व्यवसाय की रीति-नीति भी सामाजिक कार्यों का हिस्सा बनती हैं। क्या होते हैं, इस बदलाव के नतीजे? आज…
पिछले दिनों उद्योगपति नारायण मूर्ति के हवाले से युवाओं को सप्ताह में सत्तर घंटे काम करने की सलाह दी गई है। सवाल है कि इतना काम करके देश और उसकी युवा आबादी को क्या हासिल होगा? क्या इतनी सारी मेहनत…
बीएचयू में हुई एक दुर्घटना ने फिर उजागर कर दिया है कि देश के श्रेष्ठ शिक्षा संस्थानों में महिलाओं के साथ कैसा बर्ताव होता है, लेकिन क्या इसे दुरुस्त करने के रस्मी तौर-तरीके महिलाओं को उनकी हैसियत वापस लौटा सकेंगे?…
बाल दिवस (14 नवम्बर) पर विशेष देश में प्रतिवर्ष 14 नवम्बर को ‘बाल दिवस’ मनाया जाता है। सही मायनों में बाल दिवस की शुरुआत किए जाने का मूल उद्देश्य बच्चों की जरूरतों को पहचानना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और…
दीया निहायत सात्विक, सौम्य, शांत और स्निग्ध रोशनी का संचार करता है। दीये की लौ साधना तथा समर्पण की मिसाल है। उसकी सत्ता शाश्वत है। अंधेरी रात जलती दीपमाला निराशा पर आशा का ध्वज फहराती है, दुख से हर्ष की…