यह महात्मा गांधी के सम्मान का ही नहीं, लोकतंत्र के संरक्षण का सवाल भी है।
धर्म संसद में महात्मा गांधी पर की गई टिप्पणियों पर गांधी संस्थानों का बयान नईदिल्ली (सप्रेस) । देशभर की गांधी विचार से जुड़ी शीर्षस्थ संस्थानों ने हाल ही में हरिद्वार व रायपुर में हुई धर्म संसद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी…
केन और बेतवा : जबर्दस्ती का नदी जोड़
विकास की बदहवासी में आजकल उसी को अनदेखा करने का चलन हो गया है जिसकी कसमें खाकर विकास किया जाता है। पिछले दिनों केन्द्रीय केबिनेट ने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड़ इलाके की सिंचाई और पेयजल क्षमता बढाने की खातिर…
नववर्ष 2022 : नाना प्रकार के नए साल
विश्वभर के विभिन्न देशों, समाजों में नववर्ष मनाने की अपनी-अपनी भिन्न-भिन्न परम्पराएं हैं। साल के समाप्त होने और नए साल के शुरु होने के उत्सव कैसे मनाए जाते हैं? प्रस्तुत है विभिन्न देशों में नववर्ष मनाने की झलकियां। विश्व में…
क्या देश में ‘गृह युद्ध’ को आमंत्रित किया जा रहा है ?
धर्म संसद जैसे आयोजनों से उठने वाली आवाज़ें मोदी के नेतृत्व वाले भारत की छवि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तो क्षति पहुँचा ही रही है, देश के भीतर भी भाजपा की ताक़त को कमजोर कर रही है। योगी के कट्टर…
बाजार में बिकती सुन्दरता
अभी हाल में, दो लंबे दशकों के इंतजार के बाद भारत की एक युवती ‘मिस यूनिवर्स-2021’ का ताज हासिल करने में कामयाब हुई है। इसके साथ ही यह सवाल एक बार फिर उठ खडा हुआ है कि आखिर सुन्दरता कहते…
‘पुलिस आयुक्त प्रणाली’ में नागरिकों के अधिकार
आए दिन आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस और तरह-तरह के सुरक्षा बल आम निरपराध नागरिकों को प्रताडित करने, उन पर बेवजह गोली चलाने और उन्हें गिरफ्तार करने के आरोपों का सामना करते रहते हैं। ऐसे में क्या उन्हें और…
कैसे कारगर होगा, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) ?
सालभर से ज्यादा के किसानों के दिल्ली धरने में, तीन कानूनों की वापसी के बाद जिस बात का अडंगा लगा है वह ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ यानि ‘एमएसपी’ है। इसे अमल में कैसे लाया जाएगा? किन तरीकों से ‘एमएसपी’ को कारगर…
बिहार : शराबबंदी के संकट
हजारों करोड रुपयों के राजस्व को ठेंगे पर मारते हुए पांच साल पहले बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी, लेकिन क्या यह अपेक्षित सफलता पा सकी है? आंकडे और अनुभव बता रहे हैं कि एक तरफ ‘मद्यनिषेध’ से…
जहरीली खेती से जुड़ा है, ‘भोपाल गैस कांड’
2-3 दिसंबर 1984 : भोपाल गैस त्रासदी के 37 साल लंबे, दुखद और तकलीफ देह 37 साल गुजारने के बाद क्या हम यह कहने लायक हो पाए हैं कि अब कोई दूसरा ‘भोपाल गैस कांड’ नहीं होगा? जहरीले रासायनिक खादों,…
सत्ता से साधे नहीं जा सकते, गांधी
जैसे-जैसे सत्ता समाज में बसे गांधी को नकारती है, वैसे-वैसे गांधी और-और सामने आते जाते हैं। पिछले सात-आठ सालों में गांधी की ठोस पुनर्वापसी इसी बात का प्रमाण है। इसके उलट, यदि सत्ता गांधी को खारिज करना चाहती है तो…









