समसामयिक

आधी सदी का बांग्लादेश

अभी, करीब डेढ महीना पहले अपनी आजादी की आधी शताब्दी मना चुके बांग्लादेश ने 1971 में अपने गठन के साथ दो-राष्ट्रवाद के उस बेहूदे सिद्धांत को ही खारिज कर दिया था जिसने भारत विभाजन सरीखे तीखे, दर्दनाक संकट पैदा किए…

अंतर्राष्‍ट्रीय : देशों की विदेश नीतियां

अकूत मुनाफा कूटने के लिए दुनियाभर को एक मानने वाले, नब्बे के दशक के भूमंडलीकरण के बाद, अब लगभग सभी देशों में राष्ट्रवाद की हवा चली है। ऐसे में चीन अपनी पूंजी और सामरिक ताकत के साथ दुनियाभर को घेरने…

एक पक्ष के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता

सकारात्मक पत्रकारिता की तरह इन दिनों निष्पक्ष पत्रकारिता का चलन बढा है और जिस तरह सकारात्मक पत्रकारिता के नाम पर, अक्सर सत्ता-प्रतिष्ठानों की चापलूसी फल-फूल रही है, ठीक उसी तरह खुलेआम एक खास विचारधारा और सरकार की पक्षधरता के नाम…

नजरिया : खतरों से खेलता नेतृत्व

राजनेताओं और समाज का काम करने वालों का जीवन हमेशा ही खतरों के साये में रहता है और वे एक तरह से अपने काम इस समझ और तैयारी के साथ ही तय करते हैं। भारत में इसके अनेक उदाहरण हैं…

कार्पोरेटीकरण को बढ़ावा तथा गरीबों, किसानों को लूटने वाला है यह बजट : मेधा पाटकर

3 फरवरी । नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री और प्रखर वक्‍ता सुश्री मेधा पाटकर एवं सामाजिक कार्यकर्ता देवराम कनेरा, कैलाश यादव, राजा मंडलोई ने बजट पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि पिछले सालभर से अधिक समय जीवटता और शहादत के…

जनता के ‘बजट’से जनता की ही जासूसी ?प्रजातंत्र अमर रहे !

अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उस सरकार द्वारा अपने ही उन नागरिकों की जासूसी करना जिसे कि उन्होंने पूरे विश्वास के साथ अपनी रक्षा की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है एक ख़तरनाक क़िस्म का ख़ौफ़ उत्पन्न करता है। ख़ौफ़ यह कि…

पाखंडी टोटकों की तरह वापरने और पूजने वाले महात्मा गांधी

संसद में बजट प्रस्तुत करने वाली देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पास इस सहज सवाल का कोई जबाव है कि देश के कुल 63 अमीरों के पास उन्हीं के पिछले साल पेश किए गए केन्द्रीय बजट से ज्यादा सम्पत्ति…

मौसम की मार : बीमा और तकनीक में फंसा किसान

जिस कृषि क्षेत्र की बदौलत कोविड-19 की त्रासदी के बावजूद हमारा ‘सकल घरेलू उत्पाद’ यानि ‘जीडीपी’ उछलता नजर आ रहा था, उसी कृषि क्षेत्र को अब मौसम की मार झेलनी पड रही है और उसकी मदद को कोई नहीं है।…

पर्यावरण : प्रकृति को पछाड़ता प्लास्टिक

प्लास्टिक को बनाया तो इंसान ने ही है, लेकिन अब वही प्लास्टिक, भस्मासुर की तरह इंसान और उसके प्राकृतिक पर्यावास पर संकट बनकर खडा हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन ‘वर्ल्ड वाइड फंड’ (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 2030…

गांधी का ख़ौफ़ है कि उन्हें ख़त्म करने की बार-बार कोशिशें होतीं हैं !

राष्ट्रपिता की छवि और उनके विचारों की हत्या करने के योजनाबद्ध प्रयासों, बापू के द्वारा स्थापित आश्रमों के आधुनिकीकरण के नाम पर किए जा रहे विनाश और गांधी को समाप्त करने के षड्यंत्रों के प्रति सत्ता के शिखरों का रहस्यमय…