Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

समाज : परिवार में प्रताडित महिलाएं

हमारे समाज में महिलाएं, खासकर विवाहित महिलाएं सुरक्षित माने जाने वाले अपने-अपने घरों में भी असुरक्षित हैं और यह तब हो रहा है जब इसे लेकर तरह-तरह के कानून मौजूद हैं। क्या है, इस घरेलू हिंसा का दायरा? महिलाएं विवाह…

कठपुतली कला : विलुप्त होती लोक कला को पुनर्जीवित करने की जरूरत

डॉ. संजीव कुमार 21 मार्च : विश्व कठपुतली दिवस विश्व कठपुतली दिवस प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। इसकी कल्पना ईरान के प्रसिद्ध पपेटियर जावद जोल्फाघरी में सन् 2000 में XVIII कांग्रेस यूनियन इंटरनेशनेल डे ला मैरियनेट (यूएनआईएमए)…

‘द कश्मीर फाइल्स’ : कितनी फाइलें खोलेंगे आप ?

हर इतिहास के काले व सफेद पन्ने होते हैं, कुछ भूरे व मटमैले भी. वे सब हमारे ही होते हैं. कितनी फाइलें खोलेंगे आप ? दलितों-आदिवासियों पर किए गए बर्बर हमलों की फाइलें खोलेंगे ? आप थक जाएंगे इतनी फाइलें…

गांधी का ‘नमक सत्याग्रह’: शक्ति के खिलाफ अधिकार की लडाई

बॉम्बे सर्वोदय मंडल और गांधी रिसर्च फॉउन्डेशन अभी 12 मार्च को गुजरी 92 वीं सालगिरह के बाद, आज भी ‘नमक सत्याग्रह’ हमारे इतिहास के उस मोड की याद दिलाता है जिसने आजादी के अहिंसक आंदोलन को एक नई जीवनी प्रदान…

चैक अनादरण के कानून को प्रभावी बनाना आवश्‍यक

चैक अनादरण पर प्रस्तुत होने वाले फौजदारी प्रकरण वर्तमान में चिंता का विषय है। इन प्रकरणों के निराकरण में लगने वाले समय में इस कानून के प्रावधानों को प्रभावहीन बना दिया है। दिवानी प्रकरणों में लगने वाले समय के समान…

रूस-यूक्रेन संघर्ष : हथियारों के धंधे की खातिर लड़ा जाता युद्ध

भले ही गरम पानी के समुद्री रास्ते की रूस की जरूरत, यूक्रेन के ‘नाटो’ में जाने, ना जाने देने की जिद और अमरीका-रूस की पारंपरिक दुश्मनी रूस-यूक्रेन के मौजूदा युद्ध की वजहें हों, लेकिन ध्यान से देखें तो इसके पीछे…

हमारा पैसा हमारा हिसाब : डिजिटल मुद्रा

भारत में डिजिटल लेनदेन में काफी बढ़ोतरी हुई है। हालाँकि यहाँ एक बड़ा हिस्सा इसके बारे में बिल्कुल भी समझ नहीं रखता है, लेकिन सरकार अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल लेनदेन के लिए बाध्य करने के नये तरीके लेकर…

यातायात : असुरक्षित हैं, सड़कें

किसी को शारीरिक क्षति पहुंचाने की आज भी सर्वाधिक आसान तरकीब सड़क दुर्घटना है। मोटर, ट्रक, दो-पहिया जैसे स्वचालित वाहनों से किसी को ठोंक देने और नतीजे में गंभीर चोट, मृत्यु तक का दंड, जुर्माना आज भी परिणामों के मुकाबले…

आगे रही, आधी आबादी

महिलाओं की क्षमताओं और समाज में उनकी हैसियत के बारे में सभी को न सिर्फ याद रखना चाहिए, बल्कि उसे बार-बार गुनना चाहिए, भले ही इस प्रक्रिया में हमें थोडी ऊब ही क्यों न हो। ‘महिला दिवस’ मनाने की जरूरत…

बुद्धिजीवी की बेचैनी, हृदयजीवी का हर्ष

बुद्धि के संवर्धन पर हमने इतना जोर दे दिया है कि खुद को बुद्धिजीवी कहने में गर्व महसूस होता है| हम ह्रदयजीवी क्यों नहीं हो सकते? या फिर हम ज़्यादातर समय सिर्फ अपनी नैसर्गिक संवेदनात्मक क्षमता का उपयोग करते हुए,…