Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

समाज : दंगों की दास्तान

जातियों, धर्मों, लिंगों और वर्गों में विभाजित हमारे समाज में क्या दंगे यूं ही, बे-वजह या तात्कालिक वजहों से हो जाते हैं? या फिर कईयों के सतत प्रयासों, कारनामों से इन्हें अंजाम दिया जाता है? क्या आपस की मारामार में…

भारी उद्योग क्षेत्र के कार्बन रहित भविष्य पर हो रहा है मनन

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के अंतरसरकारी पैनल, IPCC, की ताज़ा रिपोर्ट  जब जारी हो रही थी, उसी दौरान, जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक और वैश्विक पहल आगे कदम बढ़ा रही थी। दरअसल वैश्विक स्तर पर उद्योगों को कार्बन रहित बनाने के…

‘कश्मीर फाईल्स’ और भारतीय सिनेमा

भरपूर मुनाफे के साथ-साथ देशभर में बवाल काट रही फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ ने हमारे सिनेमा को भी एक खास मुकाम तक पहुंचा दिया है। कल तक, जहां इस तरह की लगभग हरेक फिल्म में, भले ही कहने भर को, किसी…

गाँधी की गहराई

इतिहास के इस दौर में गांधी और उनके विचार सर्वाधिक आलोचना और समीक्षा झेल रहे हैं। शायद यह इसलिए भी है कि आज दुनियाभर को गांधी को अनदेखा कर पाना कठिन हो गया है। बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में दुनिया…

स्कूटर से सस्ता है, हवाई जहाज चलाना

डीजल, पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों के लिए केन्द्र और राज्यों की सरकारों के भारी-भरकम टैक्स जिम्मेदार माने जाते हैं, लेकिन इनमें भी गैर-बराबरी साफ दिखाई देती है। जहां आम गरीब, निम्न और मध्यंमवर्ग के जरूरी वाहन स्कूटर-कार में डाले…

ये विभाजन की विभीषिका के ‘क्लाशनिकोव’ क्षण हैं !

डर अब ‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ देखने को लेकर नहीं बल्कि इस बात पर सोचने से ज़्यादा लग रहा है कि अब अगर विभाजन की ‘वास्तविकता’ पर फ़िल्में बनाईं गईं तो वे कैसी होंगी? क्या विभाजन की त्रासदी पर ( ‘तमस’…

व्यापार युद्ध : हमारा पैसा हमारा हिसाब

रूसी अर्थव्यवस्था पर युद्ध जारी रखते हुए अमेरिका के नेतृत्व में एक तरफ दूसरे देशों को रूस के साथ व्यापार न करने को उकसाया जा रहा है तो दूसरी तरफ चीन, रूस का एक भरोसेमंद साथी बनकर उभर रहा है।…

मध्यप्रदेश : बच्चों के लिए बजट

आजकल सरकारों के सालाना बजट में तरह-तरह के प्रयोग होने लगे हैं। हाल में विधानसभा में प्रस्तुत किए गए मध्‍यप्रदेश के बजट में ‘चाइल्ड बजट’ उसी तरह का एक प्रयोग है। इसे राज्य के अनेक विभागों को आवंटित राशि में…

भगत सिंह की फांसी और महात्मा गांधी

महात्मा गांधी भी न केवल फांसी की सजा के विरोध में थे, वरन उन्होंने हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त, क्रांतिकारियों, नजरबंद लोगों की रिहाई की मांग लार्ड इरविन से की, जिन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग लगाए या…

साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई के प्रकाश पुंज भगतसिंह

देश का साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ रहा है। जो काम कभी अंग्रेजी हुकूमत करती थी वही काम इस समय देश का शासकवर्ग कर रहा है। देश का साम्प्रदायिक वातावरण बिगाड़ने, लोगों को बांटने और शासन करने की साजिशें परवान चढ़ रही…