Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

मुद्रा का रूपांतरण : ‘कैश’ की जगह ‘क्रिप्टो’

जीवन के अनेक पहलुओं, खासकर आर्थिक लेन-देन के आभासी होते जाने की तरह अब मुद्रा भी आभासी हो गई है और इसे नाम दिया गया है – ‘क्रिप्टो।’ क्या यह ‘क्रिप्टो करेंसी’ सभी को समान रूप से उपलब्ध हो सकेगी?…

यूक्रेन : गूंगी दुनिया की त्रासदी

अब रूस व नोटो के दो पाटों के बीच पिसता हुआ यूक्रेन है. यूक्रेन के भी अंतरविरोध हैं जैसे हम मुल्क में जातियों-भाषाओं-प्रांतों के अंतरविरोध होते हैं. उन अंतरविरोधों का न्याय व समझदारी से शमन करना यूक्रेन की सरकार का…

एपिसोड : हमारा पैसा हमारा हिसाब

क्या है LIC आईपीओ के पीछे की कहानी? 5% शेयर की बिक्री बस एक शुरुआत है । अपने कॉर्पोरेट दोस्तों के लिए सब कुछ दाव पर लगा देने वाली सरकार क्या 5% पर रुकेगी? अब तक LIC के पैसे से…

जो तोड़ने से भी न टूटे वह गांधी है

गांधी सामयिक हैं, यह बात नारों-गीतों-मूर्तियों-समारोहों-उत्सवों से नहीं, समस्याओं के निराकरण से साबित करनी होगी. जो गांधी को चाहते व मानते हैं उनके लिए गांधी एक ही रास्ता बना व बता कर गए हैं : अपने भरसक ईंमानदारी व तत्परता…

क्‍या हम बचा पाएंगे अपने जंगल ?

वनों के महत्व को समझने-समझाने में हम लगातार चूक कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हम लगातार वनों को खोते जा रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण चाहे कितना भी दावा कर लें, पर वनों का प्रतिशत…

‘गायब’ हो गए देश के जंगल, भारतीय वन सर्वेक्षण के आकलन की पड़ताल में खासा अंतर

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 के अनुसार, देश में ‘रिकॉर्डेड’ वन-क्षेत्र 7.75 करोड़ हेक्टेयर है, जबकि इस जमीन पर वन-क्षेत्र के मौजूदगी 5.16 करोड़ हेक्टेयर में ही है। इसका मतलब यह है कि वनों के रूप में वर्गीकृत क्षेत्र का…

EDUCATION : आईआईटी का नया कैलेंडर

‘भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ उर्फ आईआईटी देश में तकनीकी शिक्षा और शोध के सर्वश्रेष्ठ केन्द्र माने जाते हैं और उनसे आधुनिक विज्ञान और समाजशास्त्र के प्रचार-प्रसार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यदि वे ही पोगापंथी को तरजीह देने लगें तो…

पांच राज्यों में चुनाव : खारिज होता पर्यावरण

पांच राज्यों की विधानसभाओं के आसन्न चुनावों में हमेशा की तरह वे सभी धतकरम किए जा रहे हैं जिन्हें हमारे मौजूदा तर्ज के लोकतंत्र ने आत्मसात कर लिया है, लेकिन क्या इस धमा-चौकडी में हमारे जीवन के लिए जरूरी पर्यावरणीय…

लता मंगेशकर : भारत की आत्मा की आवाज

18 भाषाओं में गाए हजारों गानों का उनका संसार हमें वैसे ही ओतप्रोत करता जाता है जैसे घनघोर बारिश में आप खुद जा कर आसमान के नीचे खड़े हो जाएं। एकाग्रता, पवित्रता, माधुर्य और सादगी के मेल से लता की…

गांधी का धर्म और धर्म की राजनीति

आजकल महात्मा गांधी को सार्वजनिक तौर पर तरह-तरह से अपमानित करने का चलन हो गया है। मौजूदा सत्ता की शह पर गांधी को, उनकी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी गरियाया जाता है। तो क्या गांधी के धार्मिक विश्वास तत्कालीन धार्मिक…