समसामयिक

विचार : समानता के लिए ‘सम्पत्ति-दान’

दुनियाभर में कब्जा जमाए बैठी अश्लील गैर-बराबरी ने हर तरह के आर्थिक विचारों और उनके अमल पर चुनौती खडी कर दी है। चाहे दक्षिणपंथी हों या वामपंथी या फिर मध्यमार्गी, सभी भीषण गैर-बराबरी के सामने इस हद तक नतस्तक हैं…

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस – एक मई : मौजूदा दौर में ‘मजदूर दिवस’

पूंजी की अश्लील बढौतरी के इस जमाने में यह बात बड़े जोर-शोर से कही-उछाली जा रही है कि अब मजदूरों समेत समाज के निचले तबकों की हैसियत समाप्त हो गई है। क्या सचमुच ऐसा है? क्या किसी तरह का, कोई…

रूस-यूक्रेन युद्ध के ग्यारह तथ्य

दो महीनों से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब समूची दुनिया के सामने कुछ कठिन सवाल खडे कर दिए हैं। इस समय यह बहुत जरूरी है कि निष्पक्षता के आधार पर यूक्रेन युद्ध पर एक सुलझी हुई समझ…

समसामयिक स्थायी स्तम्भ

हमारा पैसा हमारा हिसाब नया एपिसोड : 34 लाख नौकरियां कहां गई, बेरोजगारी का संकट

एक तरफ बेरोजगारी दर कम हुई है, वहीँ रोजगार दर भी कम हो रही है। साथ ही सभी देशों में तेल की कीमतों में उछाल नए रिकॉर्ड बना रहा है। पेश है सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी टीम व्‍दारा तैयार ‘हमारा…

उत्तराखंड: रामगढ़ फलपट्टी के किसान गांधीवादी तरीके से आंदोलन के मूड में

अपने सीमित संसाधनों से अपनी खेती बागबानी बचाने वाले बहुत छोटे- छोटे किसान महिलाएं अपेक्षित सरकारी सहायता न मिलने और नीतिगत मामले में घोर लापरवाही के कारण नीति नियंताओं से बेहद नाराज़ हैं। उनका मानना है कि वे अपनी मांगों…

प्रधानमंत्री संग्रहालय : कैसी फूहड़ व खोखली आकांक्षा

दुनिया में कहीं किसी पद का कोई संग्रहालय बना हुआ है या नहीं। संग्रहालय विस्मृत प्रकृति-प्राणियों के होते हैं; बीते जमाने के वैभव के होते हैं; ऐतिहासिक घटनाओं के होते हैं या फिर उनके होते हैं जिनके ईर्द-गिर्द इतिहास आकार…

इन हिंसक भीड़ों पर नियंत्रण ज़रूरी हो गया है !

हमें भयभीत होना चाहिए कि अराजक भीड़ों के समूह अगर इसी तरह सड़कों पर प्रकट होकर आतंक मचाते रहे तो न सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था के लिए राष्ट्र्व्यापी संकट उत्पन्न हो जाएगा, उसमें शामिल होने वाले लोग धर्म और राष्ट्रवाद को ही…

श्रीलंका का आर्थिक संकट : उधारी में घी पीने का नतीजा

अपने हाथ से खुद की बदहाली करने का एक और उदाहरण हमारा पडौसी देश श्रीलंका है। वैसे तो पूंजी केन्द्रित मौजूदा आर्थिक ताने-बाने में कई देश, खासकर ‘तीसरी दुनिया’ कहे जाने वाले देश, लगातार बदहाली की गर्त में डूबते जा…

जलवायु परिवर्तन : खेती पर मंडराता खतरा

मौजूदा विकास के साथ जो संकट सर्वाधिक महसूस किया जा रहा है, वह है-जलवायु परिवर्तन का। जिस तौर-तरीके से हम अपना विकास करने में लगे हैं उससे धीरे-धीरे पहले प्रकृति, फिर वनस्पतियां और फिर खेती समाप्त होती जाएंगी। आम लोगों…

बागी आत्मसमर्पण : एक प्रश्न, तीन उत्तर

दस्यु आत्म-समर्पण में विनोबा भावे के बाद जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा और अगुआई सर्वाधिक महत्वपूर्ण रही है। उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश में फैली डाकुओं की समस्या के निदान को लेकर जेपी क्या सोचते थे? उनके मुताबिक आतंक और हिंसा की…