समसामयिक

स्‍मृति शेष / एक और जगदीप !

जगदीप छोकर अब नहीं रहे। एडीआर के संस्थापक और लोकतंत्र में चुनावी सुधार के लिए समर्पित इस जुनूनी व्यक्ति की विदाई केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि एक विचार और संघर्ष की भी विदाई है। छोकर ने साबित किया कि…

हिन्दी दिवस : विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है हिन्दी

हिन्दी, जो संस्कृत से विकसित होकर देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, भारत की राजभाषा और विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह न केवल जनभाषा के रूप में लोगों को जोड़ती है बल्कि हमारी संस्कृति,…

भाषा नहीं, भारत की पहचान का वैश्विक विस्तार है हिन्दी

हिन्दी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह दिन हमें मातृभाषा की गरिमा और वैश्विक महत्व को समझने का अवसर देता है। हिन्दी की सरलता, सौंदर्य और विविधता इसे विश्व मंच पर…

विकास : बीत चुका है, हिमालय को सुनने का समय  

मौजूदा विकास की बेहूदगी से किसी तरह अब तक बचे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के वाशिंदे चीख-चीखकर गुहार लगा रहे हैं कि अगले दस-पंद्रह सालों में उनके राज्यों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। आप यदि ध्यान से इन दिनों आने…

बेहूदे विकास से उपजे भूकंप 

अभी कुछ दिन पहले अफगानिस्तान और उसके कुछ पहले रूस में आए तीखे भूकंपों की खबरें हमारे अपने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में जानलेवा बाढ़ के मौजूदा हालात इस लिहाज से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं,…

आचार्य विनोबा भावे : आश्रम जीवन से सर्वोदय की ओर

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी आचार्य विनोबा भावे स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सत्याग्रही, भूदान-ग्रामदान आंदोलन के प्रवर्तक और ग्रामस्वराज के सशक्त प्रवक्ता रहे। महाराष्ट्र के गगोडा गाँव में जन्मे विनोबा ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, दलित उत्थान और सामाजिक सुधार…

भूदान से जयजगत तक : विनोबा भावे की प्रासंगिक विरासत

11 सितंबर को आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती पर हम उस महापुरुष को स्मरण करते हैं, जिसने सत्य, अहिंसा और सेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाया। “जय जगत” का उनका संदेश विश्वबंधुत्व, न्याय और समता पर आधारित था। भूदान…

पंजाब : बाढ़ के समय बांध से पानी छोड़ा जाना काल बन गया

भारत में बांधों को सिंचाई, बिजली और बाढ़ नियंत्रण का जरिया माना जाता है, लेकिन हालिया अनुभवों ने उनकी सीमाएँ उजागर कर दी हैं। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की बारिश से भाखड़ा, पौंग और रंजीत सागर बांधों से छोड़े गए पानी…

खामोश की जातीं पर्यावरण बचाने वालों की आवाज़ें

यदा-कदा प्लास्टिक की पन्नी बीन लेने, जीव-दया के नाम पर आवारा कुत्तों को दो-पांच रुपयों के बिस्किट खिला देने, कभी-कभार बिगड़ती हवा की लानत-मलामत कर देने और तीज-त्यौहारों पर पेड़ लगा देने को पर्यावरण संरक्षण मानने वालों को ‘ग्लोबल विटनेस’…

” जब फिल्म ‘गांधी’ मनीला में प्रदर्शित हुई..”

एक संस्मरण:  बयालीस साल पहले हाल ही में 29 अगस्त को “गांधी” फिल्म के निर्देशक एटनबरो की पुण्यतिथि थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हुए “गांधी” फिल्म की श्रेष्ठता का वर्णन किया है। तानाशाही के विरोध…