बुंदेलखंड की वीर भूमि ने एक बार फिर अपनी बेटी के साहस से इतिहास लिखा है। घुवारा की क्रांति गौंड ने गरीबी, तानों और अभावों को मात देकर क्रिकेट के मैदान पर भारत का नाम रोशन किया। जिसने कभी फटे…
छह साल पहले धारा 370 के हटने और लद्दाख को ‘केन्द्र शासित प्रदेश’ बनाए जाने से जो लोग मोदी सरकार के गुण गा रहे थे, वे अब अचानक उसी मोदी सरकार की नाराजी का शिकार बन रहे हैं। केन्द्र सरकार…
देश में जीएसटी घटाने की चर्चा “स्वदेशी” के नाम पर हो रही है, पर असल में यह कदम गरीबों पर पड़े कर के बोझ को घटाने की बजाय बड़े पूँजीपतियों को राहत देने जैसा है। स्वदेशी का अर्थ आत्मनिर्भरता, समानता…
ठीक एक शताब्दी पहले, 1925 के दशहरे के इन्हीं दिनों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की स्थापना हुई थी। उसके कर्ता-धर्ताओं की नजर में गैर-राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठन माना जाने वाला यह अ-पंजीकृत जमावडा अपने जन्म से ही विवादास्पद रहा है। क्या…
दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि इतिहास, लोकजीवन और पर्यावरणीय महत्व को भी दर्शाती है। राजस्थान में खेजड़ी कहलाने वाला यह वृक्ष रेगिस्तान का राजा माना जाता है, जिसकी छाया, फलियां और…
संयुक्त राष्ट्र की 80वीं महासभा न्यूयॉर्क में ‘बेटर टूगेदर’ के नारे के साथ शुरू हुई, जिसमें शांति, विकास और मानवाधिकारों के लिए वैश्विक एकजुटता पर जोर दिया गया। युवा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने विजन में इसे स्पष्ट किया। महासभा…
लद्दाख में पाँच वर्षों से अधूरी पड़ी माँगों ने अब चिंता और असंतोष को नया मोड़ दे दिया है। शांतिपूर्ण तरीक़े से शुरू हुआ आंदोलन हाल ही में उग्रता की ओर बढ़ा, जहाँ युवाओं की बेचैनी साफ़ दिखाई दी। यह…
आज के दौर का मीडिया, खासकर ‘सोशल मीडिया’ अपने द्वारा परोसी गई सूचनाओं से नागरिकों को जागरूक बनाए रखने की बुनियादी जिम्मेदारी से कहीं आगे बढ़ चुका है। उसकी इस ‘प्रगति’ ने जहां एक ओर नागरिकों को अपने आसपास की…
राज कुमार सिन्हा बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले संविदाकर्मियों का मुद्दा गर्मा गया है। कुछ दिन पहले पटना में संविदा कर्मचारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में अपनी नौकरी पक्की करने और बकाया वेतन की मांग को लेकर, लगभग…
पिछले एक दशक से अधिक वर्षों से देश और कतिपय राज्यों की सत्ता पर काबिज ‘भारतीय जनता पार्टी’ और ‘संघ परिवार’ के अन्य सहमना संगठनों के पास आर्थिक विकास को लेकर क्या सोच है? और क्या उनकी सोच देश को…