अद्वितीय व्यक्त्तिव के धनी डॉ. वेदप्रताप वैदिक नहीं रहे
वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. वेदप्रताप वैदिक अब इस दुनिया में नहीं रहे। वह करीब 78 साल के थे। बताया जा रहा है कि वह नहाने के समय बाथरूम में गिर गए थे, जिसके बाद तत्काल उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया,…
40वें निवानो शांति पुरस्कार की घोषणा पर गांधीवादी राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन
अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल को नागरिक अभिनंदन भोपाल, 13 मार्च। वरिष्ठ गांधी विचारक एवं शांति दूत राजागोपाल पी. वी. को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था…
स्थापना के दौर जैसी परिस्थितियों के बीच हो रहा है सेवाग्राम में सर्वोदय समाज सम्मेलन (Sarvodaya Samaj Sammelan)
देशभर से गांधीवादी होंगे शामिल, सर्वोदय समाज सम्मेलन का आयोजन 14 से 16 मार्च तक Sarvodaya Samaj Sammelan सर्वोदय समाज का 48 वां अधिवेशन अपनी स्थापना के 75 साल उसी सेवाग्राम में होने जा रहा है, जहां इसकी स्थापना हुई…
निर्यात हेतु ‘जीएम’ बासमती नहीं, तो देशवासियों के लिए ‘जीएम’ सरसों क्यों?
खेती में अनेक सरकारी हस्तक्षेपों की तरह ‘जीन-संवर्धित’ बीजों को लाने के पीछे भी उत्पादन बढाने का बहाना किया जा रहा है, लेकिन क्या बिना जांच-पडताल के किसी अज्ञात कुल-शील बीज को खेतों में पहुंचाना ठीक होगा? सरसों और धान…
स्वच्छता : गांव तक पहुंचा, कचरे का कहर
कहा जाता है कि शहरी लोग कचरे का सर्वाधिक विसर्जन करते हैं, लेकिन अब यह व्याधि गांवों तक भी पहुंच गई है। देश में प्रतिदिन 28 करोड टन ठोस कचरा पैदा हो रहा है जिसमें से 10.95 करोड टन ग्रामीण…
पुणे में कब बनेगा सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय स्मारक
दुनिया में सावित्री बाई की प्रसिद्धि बढ़ती ही जा रही है। उसके कारण भीडे वाडा में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। सभी की इच्छा पूरी इमारत देखने की होती है कहां पर लडकियां पढ़ती थी।इतिहास जाने तो यह पता…
महिला दिवस पर विशेष: 21 लाख महिलाओं का संगठन है ‘सेवा’
कलीम सिद्दीकी गांधी जी के ग्रामीण सपने को साकार करती सेवा में पिछले 50 वर्षों में कुल 18 राज्यों में 21 लाख महिलाएं सक्रिय हैं छह फरवरी 2023 को अहमदाबाद स्थित देश के पहले स्वयं सहायाता समूह सेवा (सेल्फ एंप्लाइड…
महिला दिवस : समाज में स्त्रियों की अ-दृश्य भूमिका
शंपा शाह ऐसे समय में जब देश के अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत करीब 94 फीसदी महिलाओं के आर्थिक योगदान को नकारा जाता हो, ‘सकल घरेलू उत्पाद’ यानि जीडीपी में उनकी भूमिका अनदेखी की जाती हो या उनके काम को कम…
पुष्पेंद्र पाल सिंह : पत्रकारिता, विचार और लेखन के स्वर्णिम युग का अवसान
पत्रकारिता- सामाजिक-राजनीतिक-प्रशासनिक हस्तियों ने दी सोशल मीडिया पर भावपूर्ण आदरांजलि भोपाल, 7 मार्च। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक प्रो. पुष्पेन्द्रपाल सिंह का 7 मार्च की सुबह हृदयाघात से निधन होने से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर…
बांध तो नहीं रुका, लेकिन क्या आंदोलन भी असफल रहा?
करीब चार दशकों के लंबे अनुभव में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ को अपनी सफलता-असफलता के सवालों का सामना करते रहना पडा है। एक तरफ घाटी में प्रस्तावित बांध बनते रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ आंदोलन, अपनी स्थानीय, सीमित ताकत और प्रभाव…









