अकेलापन और अवसाद : नई सदी की सबसे बड़ी चुनौती
अकेलापन अब सिर्फ़ भावनात्मक अनुभव नहीं रहा, बल्कि यह धूम्रपान और मोटापे जितना घातक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह युवाओं में आत्महत्या के जोखिम को कई गुना बढ़ाता है और बुजुर्गों में हृदय रोग व डिमेंशिया का बड़ा कारण…
विचार : भविष्य में युवा राष्ट्र से कहीं बूढ़ा भारत न बने!
देश की जनसंख्या को लेकर कोई भी टिप्पणी प्रतिक्रिया की वजह बनती है। हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर परिवार को तीन बच्चे पैदा करना चाहिए। इसके पीछे भी उन्होंने एक कारण बताया। संभव है…
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी से बढ़ती आत्महत्या की त्रासदी
विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन की पहल पर प्रतिवर्ष 10 सितम्बर को ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ मनाया जाता है। आत्महत्या जैसे गंभीर मसले पर जागरूकता बढ़ाने और संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष की…
आजादी पर्व : क्या बोल के लब आजाद है तेरे?
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक महिलाओं ने साहस, त्याग और नेतृत्व से देश का गौरव बढ़ाया है। रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू से लेकर निर्मला सीतारमण और पीवी सिंधु तक, स्त्रियों ने हर क्षेत्र में अपनी छाप…
मुंशी प्रेमचंद: जिन्होंने आम आदमी को साहित्य का नायक बनाया
मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के वो युगपुरुष हैं, जिनकी लेखनी ने आम आदमी की पीड़ा, सामाजिक कुरीतियों और आज़ादी की भावना को शब्द दिए। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक और लेखों के माध्यम से साहित्य को जन-सरोकारों से जोड़ा और हिन्दी…
जटिल है, जातिवार जनगणना
एन बिहार चुनाव के पहले की गई ‘केन्द्रीय चुनाव आयोग’ की गफलतों ने राजनीतिक जमातों में उथल-पुथल मचा दी है, लेकिन इसी की टक्कर का एक और मुद्दा देशभर में खदबदा रहा है, जातिवार जनगणना का । यह मुद्दा ऊपरी…
हरियाली अमावस्या : कल्पवृक्ष पूजन मेला
हमारे देश में अलग-अलग पर्वों पर पीपल, बरगद, आंवला, शमी, इमली आदि वृक्षों की पूजा की जाती है, परन्तु राजस्थान के अजमेर के पास गांव मांगलियावास में सावन की हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्षों के जोड़े की पूजा की जाती है।…
समाज : डायन प्रथा का दंश
सम्पत्ति और अक्सर मामूली सम्पत्ति के लिए किसी पर डायन या जादू-टोना का लांछन लगाकर क्रूरतापूर्वक मार देना इक्कीसवीं सदी के बिहार में अब भी जारी है। विडंबना यह है कि करीब अस्सी साल की आजादी के बावजूद सरकारें और…
सदभाव : अमन के लिए आशनाई
हमारे चारों तरफ फैले, फैलाए गए हिन्दू-मुसलमानों के साम्प्रदायिक तनावों में आम नागरिक क्या करे? ऐसा आम नागरिक जो इस फूहड़ता, हिंसा और घमंड़ में शामिल नहीं होना चाहता? एक तरीका है, आशनाई यानि मित्रता, प्यार का जिससे एक-दूसरे को…
विवाह रिश्तों का द्वैत : सामाजिक बंधन या व्यक्तिगत आजादी
आजकल अखबार स्त्री-पुरुष संबंधों के टूटने, अक्सर हिंसक हो जाने और नतीजे में किसी एक या दोनों की मृत्यु की खबरों से अटे पड़े रहते हैं। क्यों हो रहा है, ऐसा? समाज में स्त्री की घटती हैसियत और पितृ-सत्ता के…









