विचार

समान नागरिक संहिता को धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखें: चर्चा का यही सही समय

 ‘सेवा सुरभि’ एवं प्रेस क्लब द्वारा संवाद में शहर के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की बेबाक राय इंदौर, 9 जुलाई। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर चर्चा करने का यही सही समय है। इस मुद्दे को किसी धर्म विशेष अथवा पार्टी…

Maharashtra political crisis : ‘मूल्यविहीन राजनीति’ को चलाने-चमकाने वाले अदाकारों की ‘राजनीति’

प्रधानमंत्री जैसी खास कुर्सी पर बैठा कोई आदमी आज देश के भ्रष्टाचारियों की सूची की सार्वजनिक घोषणा करता है और कल उन सभी भ्रष्टाचारियों को अपनी सरकार में कुर्सी पर बिठा लेता है ? मतलब, वह दिखाना चाहता है कि…

organic farming जैविक कृषि के किसान की पीड़ा : अथ श्री जैविक प्रमाणीकरण कथा . . .

राजेंद्र सिंह राठौर इन दिनों जैविक खेती organic farming की भारी धूम मची है और अब मुनाफा कूटने वाले बाजार ने भी इस पर अपना कब्जा जमा लिया है, लेकिन जैविक खेती करने वाले किसानों के साथ हो रही फजीहत…

चिंतन : भय से भयभीत समाज

व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए भय एक ऐसी बीमारी है जो सतत कमजोर करती है। लालच, प्रतिस्पर्धा, हायरार्की यानि श्रेणी-बद्धता आदि वजहों से भय फलता-फूलता है और नतीजे में एक-दूसरे से डरते हुए हम लगातार कमजोर होते जाते हैं।…

कांग्रेस का हिंदुत्व प्रेम और मोहब्बत की दुकानें

साल के आख़िर में 230 सीटों वाली विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों में प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए यही तय करना बचा है कि किस पार्टी का हिंदुत्व उसे ज़्यादा उजला दिखाई देता है! कर्नाटक में…

राहुल अगर अमेरिका अभी नहीं जाते तो कब जाते ?

कल्पना करके देखिए कि इतने बड़े देश के इतने व्यापक विपक्ष में जिसमें कि छोटी-बड़ी कोई पचास राजनीतिक पार्टियाँ होंगी राहुल गांधी के अलावा और कौन सा नेता हो सकता है जो विदेशी ज़मीन पर पहुँचकर ‘भारत के विकास में…

क्यों जारी है, बाल मजदूरी (child labor) ?

डॉ.विनय कुमार दास भांति-भांति के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों के बावजूद बच्‍चों को कठिन और बदहाल रोजगारों से छुटकारा नहीं है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए बने कानूनों में ही कोई अंतर्विरोध हैं?…

‘संपूर्ण क्रांति’ : 2023 का जून 1974 का 5 जून बन पाएगा कि नहीं ?

आज भाजपा की मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है और इंदिरा गांधी का पोता राहुल गांधी उसे विपक्षी दलों के साथ खड़ा उसी पटना के गांधी मैदान से चुनौती देने का साहस बटोर रहा है। जिस ममता बनर्जी ने…

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (5जून) : सूचना प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय खतरे

पिछली दो-ढाई सदी में सूचना – प्रौद्योगिकी ने कमाल की प्रगति की है, लेकिन उसी अनुपात में इस तकनीक ने जैविक, इंसानी जीवन के लिए खतरे भी खडे कर दिए हैं। क्या हैं ये खतरे? और किस तरह से मानव…

Ground water : टूटने लगा है भूजल पर भरोसा

बेरहमी से सतही जल उलीचने और जलस्रोतों को रौंदने के बाद इंसानी हवस की भरपाई के लिए अब भूगर्भीय जल की बारी है, लेकिन हमारे पास कितना भूजल है? क्या उसे विकास की मौजूदा रफ्तार के चलते बचाया जा सकेगा?…