Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

कोरोना के सामने देशी समाज !

चहुंदिस फैली कोरोना की मारामार में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि आखिर इस व्याधि से कैसे निपटा जा सकता है? हमारे समाज में ही कुछ लोग हैं जो अपने कामकाज से इसके संकेत देते रहे हैं। कोरोना वायरस…

मोदी को सत्ता में बनाए रखना राष्ट्रीय जरूरत है !

इस कठिन समय में इस्तीफ़े की मांग करने की बजाय देश का नेतृत्व करते रहने के लिए प्रधानमंत्री को इसलिए भी बाध्य किया जाना चाहिए कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी अपने स्थान पर किसी और विकल्प की स्थापना के लिए…

प्रदूषण से पस्त होते मौलिक अधिकार

प्रकृति को ‘प्रसाद’ मानने और उसी लिहाज से उसके ‘फलों’ का उपभोग करने की नैतिक, आध्यात्मिक निष्ठा के अलावा बीसवीं सदी में रचा गया हमारा संविधान भी पर्यावरण को लेकर खासा सचेत है। उसके कई हिस्से जल, जंगल, जमीन, वायु…

कोराना काल में प्राणवायु के लिए पेड़

कोविड-19 महामारी के इस दौर में जिस अदृश्‍य, अ-स्पर्शनीय, गंधहीन और केवल महसूस की जाने वाली प्राणवायु यानि ऑक्सीजन की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, वह अपने आसपास की वनस्पतियों, पेडों में भरपूर मौजूद है। लेकिन क्या…

कोराना काल : पूंजीवाद में कोराना

कोविड-19 के इस मारक दौर में दवाओं, अस्पतालों, प्राणवायु और उसके सिलिन्डरों की भारी कमी है और उनकी कालाबाजारी तक हो रही है। क्या इसका बाजार की हमारी उस मौजूदा व्यवस्था से भी कुछ लेना-देना है जिसने नब्बे के दशक…

श्रमिकों का सम्‍मान और सबके लिए एक न्यायपूर्ण भविष्य के निर्माण का वादा

1 मई / अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस कोविड-19 के दौर और एक मई का दिन यानी मजदूर दिवस, हमें इस बात का आईना दिखाता है कि कोविड महामारी के दौर में सबसे ज्यादा अन्याय जिसने सहा वह है हमारा मजदूर वर्ग।…

गंगा की खातिर सन्यासियों के संघर्ष की गाथा

कहा जाता है कि जब सत्ता और समाज प्रकृति के जीवनदायी संसाधनों की दुर्दशा की तरफ से मुंह फेर लेते हैं तो उनकी तरफदारी में आध्यात्मिक ताकतें खड़ी होती हैं। गंगा की बदहाली से निपटने और उसकी अविरलता बनाए रखने…

हिंसा को हराने की तजबीज

पिछले करीब चालीस सालों से माना जाता रहा है कि नक्सली हिंसा देश की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती है। लेकिन उसे आज तक समाप्त नहीं किया जा सका है। आए दिन देश की सैनिक और असैनिक आबादी नक्सली मुठभेड़ के…

कोरोना से मौत एक बड़ा झूठ है !

कोरोना से मौत एक बड़ा झूठ है। इसे सरकार, सरकार समर्थक और सरकार विरोधी मीडिया, पक्ष, विपक्ष और हम सब भी बहुत बार दोहरा रहे हैं। इसी वजह से सच सात तहों के भीतर छुप गया है। जहां से इस…

बताइए ! सबसे पहले किसे बचाया जाना चाहिए ?

व्यवस्था के प्रति लोगों का यकीन समाप्त होकर मौत के भय में बदलता जा रहा है। सबसे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तो तब होगी जब ज़िम्मेदार पदों पर बैठे हुए लोग सांत्वना के दो शब्द कहने के बजाय जनता में व्याप्त…