कोविड के बाद की कक्षाएं
कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 बीमारी अब धीरे-धीरे कम होते हुए समाप्ति के संकेत देने लगी है। जाहिर है, ऐसे में हमें अपने बच्चों के स्कूल फिर से शुरु करना होंगे। लंबे समय बाद स्कूलों, खासकर उच्च और उच्च-माध्यमिक स्तर…
हिन्दी से हटती नई पीढ़ी
14 सितंबर : हिंदी दिवस पर विशेष हिन्दी एक भाषा ही नहीं, भरी-पूरी संस्कृति है और इसलिए उसे सीखना केवल भाषा-ज्ञान भर नहीं है। बदलाव की अनिवार्यता के चलते जब रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज आदि सभी बदलते जा रहे हैं तो…
महाकुम्भ की तरह हर 12 वर्ष में आता है नीलकुरूंजी का दुर्लभ फूल
पेड़-पौधों में रूचि रखने वालों वनस्पति शास्त्र के शिक्षक व विद्यार्थी तथा प्रकृति सौदर्यं को निहारने वालों के लिए नीलकुरूंजी का फूलता फूल किसी महाकुम्भ से कम नहीं है। पर्यटकों को इन फूलों की खूबसूरती को देखने के लिए 12…
अभयारण्य से भयभीत गांव
अपने आकार के करीब एक चौथाई इलाके में जंगल वाले मध्यप्रदेश में नए अभयारण्यों का प्रस्ताव आया है। ऐसे में उन लोगों को क्या होगा जो इन जंगलों को अपना माई-बाप मानकर उन पर निर्भर जीवन जीते और एन उसके…
बाइडन को भूलिए, इस 9/11 पर मोदी जी का संकल्प क्या है?
अभी यह भी साफ़ किया जाना बाक़ी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता सिर्फ़ अफगानिस्तान की ज़मीन का आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देने तक ही सीमित है या लोकतंत्र की बहाली के लिए वहाँ चल रहे…
विचार : राष्ट्रवाद बनाम मानवता
उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में जिस अवधारणा ने राष्ट्रों के एकीकरण के साथ-साथ सर्वाधिक युद्धों की पृष्ठभूमि तैयार की है, वह राष्ट्रवाद ही है। क्या है, यह राष्ट्रवाद? इस अवधारण ने कैसे सत्ताओं को प्रभावित और सक्रिय किया है? पिछले…
पर्यावरण : घर के भीतर प्रदूषण
हाल के अध्ययन बता रहे हैं कि वायु-प्रदूषण अब घर, स्कूल और तरह-तरह के कमरों के भीतर तक पहुंच गया है और इससे बचना है तो हमें तेजी से कुछ उपाय करना होंगे। एक ताजा अध्ययन में पता चला है…
असम-मिजोरम विवाद : टूटती धर्मनिपेक्षता की धुरी
अभी हाल में असम-मिजोरम विवाद ने भारी सुर्खियां बटोरी थीं। सम्पूर्ण-प्रभुसत्ता-सम्पन्न भारत गणराज्य के ये दोनों राज्य दुश्मनों की तरह आखिर क्यों लडे थे? क्या थे, उनके बीच के मुद्दे और राजनीति? करोड़ों भारतीय आतुर थे कि हमारे देश के…
खेल और खिलाड़ी से पूंजी के खिलवाड़
हमारे समय में खेल तक पैसा कमाने का एक ऐसा जरिया बन गए हैं जिसमें चांदी काटने के लिए तरह-तरह के हथकंडे किए जाते हैं। हाल का टोकियो ओलिंपिक भी इससे अछूता नहीं रहा है। खिलाड़यों के रिकार्ड और मेडल…
नजरिया : क्या भूलूं, क्या याद करूं?
हम क्या भूलें ? उस दरिंदगी को भूलें जिसे विभीषिका कहा जा रहा है। वह विभीषिका नहीं थी, क्योंकि वह आसमानी नहीं, इंसानी थी। उसे इतिहास के किसी अंधेरे कोने में दफ्न हो जाने देना चाहिए क्योंकि वह हमें गिराता…









