Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

एसएन सुब्बराव : गीत गाने वाले एक सिपाही का अवसान

श्रद्धांजलि गांधी विचार को आत्मसात करके जीने और उससे लगातार समाज को सम्पन्न करते रहने वाली पीढी के एक अप्रतिम व्यक्ति भाईजी यानि एसएन सुब्बराव (93 वर्ष) हाल में हमसे सदा के लिए विदा हो गए हैं। प्रस्तुत है,‘सप्रेस’ के…

भोजन के बाजार में भुखमरी

पिछले कुछ सालों में भोजन के बाजार ने भूख को किनारे कर दिया है। आजादी के बाद की तीखी भुखमरी के बरक्स हमने उत्पादन तो कई-कई गुना और इतना अधिक बढा लिया है कि पैदावार के भंडारण की समस्या खडी…

पहाड़ को क्रांक्रीट का नहीं, अपने नैसर्गिक स्वरूप का विकास चाहिए

यूं तो हमारे देश में विकास की मौजूदा अवधारणा कहीं भी कारगर होती दिखाई नहीं देती, लेकिन पहाड़ों, खासकर नए और अभी बन ही रहे हिमालय पर इस विकास की व्यापक मार तेजी से दिखाई दे रही है। पिछले कुछ…

गांधी के स्वशासन से सुशासन का रास्ता

महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा में सुशासन की मार्फत स्वशासन को स्थापित करना शामिल था। इन दिनों गांधी के इसी सुशासन, स्वशासन की बात को फैलाने के लिए कई छोटे-बडे दल दुनियाभर में यात्राएं कर रहे हैं। कोविड -19 महामारी…

सामयिक : एक था, ‘एयर इंडिया’

कई सालों की मशक्कत के बाद हाल में टाटा कंपनी को ‘एयर इंडिया’ बेचकर मचाई जा रही बल्ले-बल्ले में किसी को उसकी अंतर्कथा दिखाई ही नहीं दे रही। यानि कि अभी कुछ साल पहले तक ठाठ से चलने वाली हमारे…

मध्यप्रदेश : बिजली की बाजीगरी

मध्यप्रदेश में बिजली की आपूर्ति का कारनामा अब ठीक वह कर रहा है जिसे मुहावरे में ‘माल-ए-मुफ्त, दिल-ए-बेरहम’ कहा जाता है। एक तरफ, सरकारी जल-विद्युत परियोजनाओं की सस्ती बिजली को ठेंगे पर मारते हुए जिन निजी कंपनियों से बिजली खरीदी…

महात्मा गांधी बूढ़े होते दिख रहे हैं या जवान?

महात्मा गांधी अपनी मृत्यु के बाद और भी युवा होते जा रहे हैं। युवा अवस्था महज शरीर में तेजी से दौड़ने वाले हार्मोन को नहीं कहते। वह विचारों का ऐसा केमिकल लोचा है जो खत्म होने का नाम ही नहीं…

शांति, अशांति,विचार और विचारधारा की बुनियाद

विचार और वस्तु के बीच का सदियों पुराना द्वंद्व क्या साम्प्रदायिक और गैर-साम्प्रदायिक भी हो सकता है? क्या विचार पर विचारधारा की अहमियत एक तरह की साम्प्रदायिकता को जन्म देती है? और क्या अपने चतुर्दिक फैले व्यापक संसार में शांति…

साबरमती आश्रम : ‘वर्ल्ड-क्लास’ बनाने की सरकारी जुगत

करीब 13 लंबे सालों तक महात्मा गांधी के घर की हैसियत का ‘साबरमती आश्रम’ पिछले दो साल से सरकार के पर्यटन उद्योग की निगाहों में चढ गया है। नतीजे में गांधी की सादगी, शुचिता और किफायत के मूल्यों को ठेंगे…

‘गुरुजी’ यानि रवीन्द्र शर्मा : कलाओं का जीवन और जीवन में कलाएं

कलाएं हमारे जीवन को जिस शिद्दत से प्रभावित करती हैं, उसी तरह से हमारा जीवन भी कलाओं को प्रभावित करता है। कला और जीवन की आपसी द्वंद्वात्मकता पर टिकी इस समझ को बिरले ही जान पाते हैं। आंध्रप्रदेश के ‘गुरुजी’…