समसामयिक

भूदान आंदोलन के बाद अब भू-मुक्ति

पचास के दशक में विनोबा भावे की अगुआई में शुरु हुआ ‘भूदान आंदोलन’ अब किस परिस्थिति में है? क्या उसने अपने घोषित उद्देश्यों में कुछ हासिल किया है? आज भूमि वितरण के इस महायज्ञ में क्या जोडा जा सकता है?…

चिकित्सा का सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प है होम्योपैथी

10 अप्रैल  : विश्व होम्योपैथी दिवस प्रतिवर्ष 10 अप्रैल को ‘होम्योपैथी’ के जनक माने जाने वाले जर्मन मूल के चिकित्सक, महान विद्वान, शोधकर्ता, भाषाविद और उत्कृष्ट वैज्ञानिक डा. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन के जन्मदिवस के अवसर पर ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’…

लद्दाख : पहाड़ों, नदियों के विनाश के खिलाफ व भविष्य के लिए खड़े होते लोग

पिछले 2 महीनों से 3 लाख आबादी वाले लद्दाख की 10 प्रतिशत आबादी यानि 30 हज़ार से भी ज़्यादा लोग, अपने जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण, अपने रोजगार और समाज और अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं! लद्दाख की 90% आबादी आदिवासी…

चुनाव में नहीं चुना जाता ‘पर्यावरण’

बहुत अधिक पीछे न जाकर पिछले 11-12 वर्षों में घटी प्रमुख त्रासदियों (केदारनाथ, जोशीमठ एवं सिक्किम) त‍था मौसम की चरम घटनाओं को देखते हुए अब यह जरूरी हो गया है कि सभी राजनैतिक दल आगामी लोकसभा चुनाव (2024) में पर्यावरण को महत्व दें।…

गलतियों का हिमालय : जनता को तो अहसास होना ही चाहिए

आजादी की लड़ाई की शुरुआत की बात है। गांधीजी ने ‘असहयोग आंदोलन’ का आह्वान किया था। वैसी देशव्यापी हड़ताल इतिहास में कभी देखी नहीं गई थी ! लगने लगा था कि अंग्रेजों के पांव उखड़ जाएंगे, लेकिन तभी गांधीजी ने अचानक पूरा आंदोलन…

बंद होती बातचीत

नंदिता मिश्र आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं उसमें संचार और सम्पर्क के साधनों की कोई कमी नहीं है। जितना व्यक्तिगत सम्पर्क इस समय हो रहा है, इतना पहले कभी नहीं हुआ होगा। मोबाईल ने तो हमारी दुनिया ही…

उपभोक्ताओं की उम्मीद के कानून

मौजूदा दौर में इंसानों की पहचान का एक बेहद जरूरी संकेत उसका उपभोक्ता होना है। यानि आप कभी भी, कुछ भी, कहीं भी कर रहे हों, लेकिन अंतत: आप एक उपभोक्ता जरूर होते हैं। ऐसे में हम अपनी यह भूमिका…

Gold: सोने की सदारत

सोने से करेंसी की कीमत आंकने के दिन भले ही अब बीत गए हों, लेकिन सोने की चमक अब भी बरकरार है। भारत का सुरक्षित स्वर्ण भंडार के लिहाज से अग्रणी देशों में शामिल होना गौरव की बात है। क्या…

2023 में चौंतीस बार कांपी है, हिन्दुस्तान की धरती

भू-वैज्ञानिक मानते हैं कि इंडियन पेनिसुला के यूरेशियन प्लेट से टकराने के नतीजे में धरती हिलती-डुलती है और भूकम्प आते हैं। इसके अलावा धरती के भीतर की ऊर्जा के दबाव में भी भूकम्पन होता है, लेकिन इसके प्रभाव-क्षेत्र में इंसानी…

सनातन सांस्कृतिक लोक की पुस्तकों में बढ़ती प्रस्तुति

World Book Fair 2024 Delhi विश्‍व पुस्तक मेला दर्शक संख्या की दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। इस बार मेले का क्षेत्रफल 50,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में विस्तृत कर दिया है। इसमें 40 से ज्यादा देशों के 2000…