ऊर्जा : परमाणु ऊर्जा में विदेशी पैसा
डेढ दशक पहले अमरीका के साथ होने वाले जिस परमाणु समझौते को लेकर तब की मनमोहन सिंह सरकर गिरने-गिरने को हो गई थी, आज वही परमाणु ऊर्जा खुल्लम-खुल्ला धंधे में उतर आई हैं। दुनियाभर में गरियाई जा रही यह ऊर्जा…
वन के व्यापार में बेदखल होते आदिवासी Tribals
अपने तरह-तरह के जैविक, सामाजिक और प्राकृतिक उपयोगों के आलावा आजकल जंगल व्यापार-धंधे में भी भारी मुनाफा कूटने के काम आ रहे हैं। इसमें सेठों, सरकारों की बढ़-चढ़कर भागीदारी हो रही है। कैसे किया जाता है, यह कारनामा? और क्या…
‘पेसा कानून’ के बरक्स बसनिया बांध
आज के विकास की मारामार में सरकारें और कंपनियां उन कानूनों तक को अनदेखा कर रही हैं जिन्हें बाकायदा संसद में पारित किया गया है। इन कानूनों के मैदानी अमल के लिए बनाए जाने वाले नियमों में, मूल कानून की…
जनजातीय गौरव दिवस और सत्ता प्रतिष्ठान का दोहरा चरित्र
आज सत्ता प्रतिष्ठान बिरसा मुंडा का नाम लेते हैं परन्तु यही सत्ता विकास के नाम पर लाखों आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर विस्थापित कर दिया है। विस्थापन की त्रासदी ऐसी की शहर के झुग्गी झोपड़ी में रहकर मजदूरी…
‘पेसा’ के प्रभाव : कितना मानेंगे, सरकारी मोहकमे
संसद में अपने पारित होने के करीब 26 साल बाद मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटैल ने ‘पंचायत उपबंध (अधिसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम – 1996’ यानि ‘पेसा’ को लागू करने के लिए संबंधित विभागों की सहमति मांगी है। जैसा आमतौर…
आदिवासियों की बदहाली के संवैधानिक गुनहगार
संविधान में आदिवासियों को मिले विशेष दर्जे को आमतौर पर अनदेखा किया जाता रहा है। मसलन – राज्यपालों को अनुसूचित क्षेत्रों में विशेषाधिकार दिए गए हैं, ताकि वे आदिवासियों की विशिष्ट जीवन पद्धतियों, खान-पान और भाषा आदि को देखते हुए…
नियमों के जरिए कमजोर किया जाता, ‘पेसा’ का प्रभाव
‘पेसा कानून’ के पारित होने की करीब चौथाई सदी बीत जाने के बाद अब जाकर मध्यप्रदेश में उसे लागू करने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। विडंबना यह है कि इन नियमों में अनेक विसंगतियां हैं। मसलन- जिस ग्रामसभा…
‘पेसा’ (PESA) से उलट ‘पेसा’ (PESA) के नियम
जनजातीय गौरव दिवस’ (15 नवम्बर) मध्यप्रदेश सरकार को करीब ढाई दशक पहले संसद में पारित ‘पेसा कानून’ की अब जाकर सुध आई है। पांच महीने पहले ‘पेसा’ के नियम-कानूनों का दस्तावेज तैयार करके उस पर संबंधित विभागों की राय मांगी गई,…
मध्यप्रदेश : बिजली की बाजीगरी
मध्यप्रदेश में बिजली की आपूर्ति का कारनामा अब ठीक वह कर रहा है जिसे मुहावरे में ‘माल-ए-मुफ्त, दिल-ए-बेरहम’ कहा जाता है। एक तरफ, सरकारी जल-विद्युत परियोजनाओं की सस्ती बिजली को ठेंगे पर मारते हुए जिन निजी कंपनियों से बिजली खरीदी…
अभयारण्य से भयभीत गांव
अपने आकार के करीब एक चौथाई इलाके में जंगल वाले मध्यप्रदेश में नए अभयारण्यों का प्रस्ताव आया है। ऐसे में उन लोगों को क्या होगा जो इन जंगलों को अपना माई-बाप मानकर उन पर निर्भर जीवन जीते और एन उसके…









