नर्मदा को निगलती ‘विकास’ परियोजनाएं
आधुनिक विकास को विनाश में तब्दील होते देखना हो तो देश के ठीक बीच से प्रवाहित नर्मदा नदी के साथ किया जाने वाला दुर्व्यवहार देख लेना चाहिए। यह जानना सचमुच बेहद दुखदायी है कि कोई सत्ता और समाज कैसे अपनी…
ऊर्जा-क्षेत्र में सौर ऊर्जा की दावेदारी
हाल में कोराना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रदूषण और उसके नतीजे में होने वाले जलवायु परिवर्तन की बडी वजह ऊर्जा संयत्र हैं। वैसे भी दुनियाभर में बिजली उत्पादन के…
व्यवसाय के लिए वन
आधुनिक व्यापार-व्यवसाय ने अब तेजी से प्राकृतिक संसाधनों को अपनी चपेट में लेना शुरु कर दिया है। जंगल, जिन्हें सुप्रीमकोर्ट द्वारा दी गई परिभाषा के मुताबिक केवल रिकॉर्ड में जंगल की तरह दर्ज होना ही काफी है, निजी कंपनियों को…
सिंगरौली का स्याह सच
साठ के दशक में रिहंद बांध की नींव रखते हुए तब के राजनेताओं, खासकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को इस पहल के नतीजों का कोई भान शायद ही रहा हो। देश की ऊर्जा राजधानी खडी करने के जुनून ने…
बर्बाद होता अनाज और बेकार होता ‘अन्नदाताओं’ का श्रम
भरपूर उत्पादन और तीखी भुखमरी के बीच की उलटबासी के मैदानी अनुभवों की एक बडी वजह हर साल होती अनाज की बर्बादी और उसके लिए जरूरी भंडारण का अभाव है। अनाज की बर्बादी हमारे यहां सालाना होने वाली एक शर्मनाक…
विनाश हो गया है, आदिवासियों के लिए विकास
आजादी के बाद से हमारे देश में जिस तौर-तरीके का विकास हुआ है उसने आदिवासी इलाकों में उसे विनाश का दर्जा दे दिया है। खनन, वनीकरण, ढांचागत निर्माण और भांति-भांति की विकास परियोजनाओं ने आदिवासी इलाकों की मट्टी-पलीत कर दी…
नर्मदा : बूँद- बूँद जल का दोहन
सौंदर्य की नदी नर्मदा में जितना भी सौंदर्य बचा है, वह भी यात्रा वृत्तांत के पन्नों में सिमटने वाला है। नर्मदा नदी के किनारे प्रस्तावित 18 थर्मल एवं परमाणु बिजली परियोजना की स्थापित क्षमता 25 हजार 260 मेगावाट है। 22…
‘विकास’ नहीं ‘विनाश’ का टापू है बरगी बांध
भारत वर्ष में अभी तक विभिन्न परियोजनाओं से लगभग 5 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं। मध्य प्रदेश में नर्मदा परियोजना के अन्तर्गत नर्मदा नदी पर 30 बड़े बाँध, 135 मझोले बाँध और 3000 छोटे बाँध बनाने की योजना प्रस्तावित…
कंपनी के लिए टाला जाता, पर्यावरणीय प्रभावों का आंकलन
अस्सी के दशक में जिस पर्यावरण के दुख में सरकार और समाज दूबरा हुआ जाता था, अब वही पर्यावरण आंख की किरकिरी बनकर महज टालने योग्य प्रक्रिया बनकर रह गया है। नर्मदा की मुख्यधारा पर बने पहले बडे बांध ‘रानी…








