हिन्दी, जो संस्कृत से विकसित होकर देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, भारत की राजभाषा और विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह न केवल जनभाषा के रूप में लोगों को जोड़ती है बल्कि हमारी संस्कृति,…
हिन्दी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह दिन हमें मातृभाषा की गरिमा और वैश्विक महत्व को समझने का अवसर देता है। हिन्दी की सरलता, सौंदर्य और विविधता इसे विश्व मंच पर…
देश की जनसंख्या को लेकर कोई भी टिप्पणी प्रतिक्रिया की वजह बनती है। हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर परिवार को तीन बच्चे पैदा करना चाहिए। इसके पीछे भी उन्होंने एक कारण बताया। संभव है…
मौजूदा विकास की बेहूदगी से किसी तरह अब तक बचे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के वाशिंदे चीख-चीखकर गुहार लगा रहे हैं कि अगले दस-पंद्रह सालों में उनके राज्यों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। आप यदि ध्यान से इन दिनों आने…
12 सितंबर को प्रो. जगदीप छोकर के निधन से लोकतंत्र का एक प्रहरी चला गया। एडीआर की पहल से मतदाताओं को उम्मीदवारों की आपराधिक, आर्थिक व शैक्षिक पृष्ठभूमि जानने का अधिकार मिला और ‘नोटा’ विकल्प भी संभव हुआ। उनकी भूमिका…
अभी कुछ दिन पहले अफगानिस्तान और उसके कुछ पहले रूस में आए तीखे भूकंपों की खबरें हमारे अपने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में जानलेवा बाढ़ के मौजूदा हालात इस लिहाज से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं,…
वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश में 18,000 से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई भोपाल, 11 सितंबर । अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के जिला संस्थान द्वारा वार्षिक कार्यक्रम “सफ़र –शिक्षा से समाज तक” का आयोजन भोपाल में संयोजित किया गया।…
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी आचार्य विनोबा भावे स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सत्याग्रही, भूदान-ग्रामदान आंदोलन के प्रवर्तक और ग्रामस्वराज के सशक्त प्रवक्ता रहे। महाराष्ट्र के गगोडा गाँव में जन्मे विनोबा ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, दलित उत्थान और सामाजिक सुधार…
11 सितंबर को आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती पर हम उस महापुरुष को स्मरण करते हैं, जिसने सत्य, अहिंसा और सेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाया। “जय जगत” का उनका संदेश विश्वबंधुत्व, न्याय और समता पर आधारित था। भूदान…
विनोबा भावे की जयंती हमें याद दिलाती है कि सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर सेवा ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है। उनका विचार था कि गांव का भला गांव के लोगों के हाथ में है, न कि केवल सरकार…