श्रम की प्रतिष्ठा के लिए काम के बदले अनाज
ग्रामीण बेरोजगारी के संकट के इस दौर में देश के ख्यात सामाजिक संगठन ‘एकता परिषद’ ने एक अभिनव प्रयोग किया है। काम के बदले अनाज की पारम्परिक पद्धति में श्रम की प्रतिष्ठा जोडकर ‘एकता परिषद’ ने ग्रामीणों को अपने इलाके…
आश्वासन मिलने के बाद ही जुलिया 728 दिन बाद पेड़ से नीचे उतरी
आज हुई थी विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन की शुरूआत उत्तराखंड के रेणी गांव निवासी श्रीमती गौरादेवी ने भी 26 मार्च, 1974 की रात को अन्य महिलाओं के साथ जागकर पेड़ों की कटाई रूकवाकर विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन की शुरूआत की…
‘चौरी-चौरा’ के सौ साल बाद किसान आंदोलन
सौ से अधिक दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन अब केवल तीन कानूनों की वापसी और ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ की वैधानिक गारंटी तक सीमित नहीं रह गया है। उसमें लंबे और प्रभावी आंदोलन के तौर-तरीके, अहिंसा की…
किसानों की बेचैनी की वजहें
दिल्ली की सीमाओं पर करीब दो महीने से ठंड, बरसात और तरह-तरह की दुर्घटनाओं को झेलते बैठे किसानों ने एन ‘गणतंत्र दिवस’ पर टैक्टर रैली का आयोजन किया था, लेकिन कुछ विघ्न-संतोषी लोगों के चलते इसमें हिंसा, मारपीट और सम्पत्ति…
2020 और 2021 के भोपाल का फर्क, उर्फ ठंड कुछ ज्यादा है इस बार !
किसान आंदोलन भोपाल में दो कदम आगे बढ़ा है। नीलम पार्क पर जहां प्रशासन ने बैठने भी नहीं दिया है, तो वहीं मंडी गेट पर दो दिन तक नारों और भाषणों का दौर जारी रहा। अब आगे भी सीमित ताकत,…
अध्यादेशों पर क्यों नहीं हैं किसान आंदोलन
संसद के मौजूदा सत्र में किसानों और किसानी को प्रभावित करने वाले उन तीन विवादास्पद अध्यादेशों के कानून बनने की संभावना है जिन्हें केन्द्र सरकार ने अभी जून में लागू करके देशभर के किसान संगठनों के बीच बवाल खडा कर…
सन् 85 के पहले भी था, बांध का विरोध
नर्मदा बचाओ आंदोलन के 35 बरस ‘सरदार सरोवर’ के प्रभावितों-विस्थापितों को पैंतीस साल पहले पुनर्वास के जो रंगीन सपने दिखाए गए थे, ठीक उसी तर्ज पर चालीस-पैंतालीस साल पहले तवा के विस्थापितों को भी ललचाया गया था। विस्थापन के नाम…
सर्वस्व ‘लुटाने’ वाले बांध प्रभावितों से राजनीति करती रहीं, पिछली सरकारें
नर्मदा पर बने ‘सरदार सरोवर’ बांध के विस्थापितों को बरसों बाद अपने हक में कुछ सकारात्मक होता दिखाई दिया है। पिछली केन्द्र और राज्य सरकारों के ‘शून्य’ विस्थापन-पुनर्वास मानने के बरक्स मध्यप्रदेश की नई सरकार ने विस्थापितों की उनके गांवों…
खतरे में आदिवासी : विकास की अवधारणा का शिकार
भारत में निवास कर रहा आदिवासी समुदाय ’’विकास’’ की आधुनिक अवधारणा का शिकार होकर धीरे-धीरे अपने पारंपरिक रहवास से बेदखल हो रहा है। बांध से लेकर खनन तक, समस्त परियोजनाओं की सबसे ज्यादा मार आदिवासियों पर ही पड़ती है। पुष्पा…








