नई दिल्ली में कोप 30 की तैयारी बैठक में राजेंद्र सिंह और कैलाश सत्यार्थी समेत कई गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 1 सितंबर 2025 को ब्राजील कोप 30 (COP30) की तैयारी बैठक आयोजित हुई। इसमें भारत…
दिल्ली और एनसीआर में फैले लैंडफिल ठिकाने सिर्फ कचरे के ढेर नहीं, बल्कि हवा और पानी को ज़हर बना देने वाले खतरनाक गैस कारखाने हैं। यहां से निकलने वाली मीथेन और अन्य जहरीली गैसें वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य संकट और आग…
जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच जैव ईंधन एक टिकाऊ और स्वच्छ विकल्प के रूप में उभर रहा है। 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व जैव ईंधन दिवस ग्रीनहाउस…
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में खीरगंगा और धराली में फटे बादलों ने एक बार फिर देवभूमि को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है। 50 से अधिक घर, 30 होटल और 100 से ज्यादा लोग लापता हैं। यह कोई आकस्मिक…
28 जुलाई को मनाया जाने वाला ‘विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस’ हमें इस सच्चाई से रूबरू कराता है कि लगातार मानवीय गतिविधियों और प्रकृति से छेड़छाड़ के चलते मौसम चक्र असंतुलित हो चला है। ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा, वनों की आग…
हमारे देश में अलग-अलग पर्वों पर पीपल, बरगद, आंवला, शमी, इमली आदि वृक्षों की पूजा की जाती है, परन्तु राजस्थान के अजमेर के पास गांव मांगलियावास में सावन की हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्षों के जोड़े की पूजा की जाती है।…
क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? लंदन। हाल ही में प्रकाशित पत्रिका द इकोलाजिस्ट एवं ग्रीनपीस की एक संयुक्त रिपोर्ट ने ब्रिटेन में जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध हो रही गिरफ़्तारियों और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए…
पर्यावरण का जो संकट अब ठेठ हमारी देहरी तक पहुंच गया है और जिसे लेकर सालाना कर्मकांड की तरह कई दिवस भी मना लेते हैं, क्या वह हमारे ही जीवन-यापन के धतकरमों का नतीजा नहीं है? मसलन, दिनों-दिन बढ़ता-फैलता कचरे…
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं अब सिर्फ पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानवीय संकट बन चुकी हैं। पिछले एक दशक में दुनिया भर में करोड़ों लोग बाढ़, सूखा, तूफान और समुद्र स्तर बढ़ने के कारण अपने घरों से उजड़ चुके हैं। विशेष…