कौसानी में Youth for Truth कार्यशाला का शुभारंभ कौसानी, 8 जून। कौसानी के अनासक्ति आश्रम में गॉंधीजनों के Youth for Truth कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए गांधीवादी विचारक पद्मश्री राधा बहन भट्ट ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डर…
कौसानी, 6 जून। महात्मा गांधी की ऐतिहासिक तपोभूमि अनासक्ति आश्रम, कौसानी में शनिवार, 7 जून से देशभर के प्रमुख गांधीवादी विचारकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं का तीन दिवसीय चिंतन एवं प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ हो रहा है। गौरतलब है कि यह…
सबको मालूम है कि गाँधीजी कमाल के पत्रकार-संपादक थे। उनका अधिकांश लेखन अखबारों के लेख-टिप्पणियों, पत्रों और सूचनाओं की शक्ल में मौजूद है। अलबत्ता, लेखन की इस प्रक्रिया में वे अपने पाठक भी तैयार करते थे। कोई उनके (या किसी…
1 से 7 जून तक औरंगाबाद में राष्ट्रीय युवा संगठन का 29वां राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर औरंगाबाद (महाराष्ट्र), 4 मई। आज का भारत जिन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक संकटों से जूझ रहा है, वह युवाओं से सिर्फ सवाल नहीं, ठोस पहल…
जब दुनिया ने बदलाव के लिए हिंसा का शोर चुना, तब विनोबा भावे ने मौन पदचाप से क्रांति की इबारत लिखी। 18 अप्रैल 1951 को पोचमपल्ली से शुरू हुआ भूदान आंदोलन इस विश्वास का प्रतीक बन गया कि सच्चा परिवर्तन…
हाल के दिनों में देशभर में साम्प्रदायिकता का जहर तेजी से फैला है और नतीजे में समाज का तीखा विभाजन हो रहा है। ऐसे में महात्मा गांधी ही याद आते हैं। वे होते तो ऐसे हालातों में आखिर क्या करते?…
नई दिल्ली, 25 मार्च। पूर्व ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुरलीधरन को केंद्रीय गांधी स्मारक निधि का नया न्यासी नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति का स्वागत करते हुए निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही, सचिव संजय सिंह, राष्ट्रीय…
कस्तूरबा केवल महात्मा गांधी की जीवनसंगिनी ही नहीं थीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की एक अद्वितीय,प्रचंड क्रांतिकारी शक्ति भी थीं। उनका जीवन त्याग, निर्भीकता और अनवरत संकल्प का ऐसा ओजस्वी महाकाव्य है, जो प्रत्येक भारतीय के हृदय में प्रेरणा का अखंड दीप प्रज्ज्वलित करता…
मोहनदास करमचंद गांधी की महात्मा बनने तक की यात्रा में कस्तूरबा की खासी अहमियत रही है। कस्तूरबा वीरता और त्याग में अपने पति से किसी भी प्रकार कम नहीं थीं। गांधीजी ने खुद कहा है कि मैंने अंहिसा-शक्ति कस्तूरबा से…
प्रो. आर के जैन “अरिजीत” मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में 12 फ़रवरी की सुबह जब सूरज अपनी स्वर्णिम किरणें बिखेरता है, तब नर्मदा के पावन तट पर एक ऐतिहासिक आयोजन सजीव हो उठता है—सर्वोदय मेला। यह मेला केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, कस्तूरबा…