” जब फिल्म ‘गांधी’ मनीला में प्रदर्शित हुई..”
एक संस्मरण: बयालीस साल पहले हाल ही में 29 अगस्त को “गांधी” फिल्म के निर्देशक एटनबरो की पुण्यतिथि थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हुए “गांधी” फिल्म की श्रेष्ठता का वर्णन किया है। तानाशाही के विरोध…
ग्रामीण जीवन को समृद्ध बनाने में देवेंद्र कुमार गुप्ता के प्रौद्योगिकी प्रयोग आज भी उतने ही प्रासंगिक है : पद्मविभूषण चंडी प्रसाद भट्ट
ग्रामीण प्रौद्योगिकी के पुरोधा देवेंद्र भाई गुप्ता की जन्मशताब्दी वर्ष पर दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट नई दिल्ली,31 अगस्त। ‘डॉ. देवेन्द्र कुमार गुप्ता जमीन से जुड़े सच्चे गांधीवादी वैज्ञानिक थे। जिनसे हमेशा प्रेरणा मिलती रहती थी…
खादी स्वतंत्रता व स्वावलंबन की प्रतीक है, राष्ट्र की आत्मनिर्भरता इसी पर टिकी है- डॉ. संजय सिंह
भोपाल के गांधी भवन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी का आयेाजन भोपाल, 8 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर बात रखते हुए केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के मंत्री एवं गांधी भवन…
युद्धकाल : बूचड़खाने में बदलती दुनिया
महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि ‘आंख के बदले आंख निकाली जाए तो अंत में समूची दुनिया अन्धी हो जाएगी।’ कौन जानता था कि गांधी की विदाई के 77 साल बाद यह बात कहावत से निकलकर कड़वी सच्चाई में…
विचार : लोगों को जोड़ने के लिए अहिंसक आंदोलन
हम चाहें या ना चाहें, इंसानियत को बचाए रखने के लिए अहिंसक, लोकतांत्रिक और मानवीय प्रयासों की ही जरूरत पड़ती है। ये प्रयास सामूहिक हों तो और बेहतर। ऐसे प्रयासों को कारगर बनाने के लिए उन्हें लगातार याद करते रहना…
वरिष्ठ गांधीवादी विचारक रामचंद्र राही को मिलेगा द्वितीय पी. गोपीनाथन नायर पुरस्कार
तिरुवनंतपुरम के निकट नेय्याटिंकारा में होगा सम्मान समारोह तिरुवनंतपुरम, 5 जुलाई। वरिष्ठ गांधीवादी विचारक, लेखक एवं केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष श्री रामचंद्र राही को दूसरे ‘पी. गोपीनाथन नायर पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के अंतर्गत ₹50,000…
प्रकृति का पर्यावरण
पर्यावरण का जो संकट अब ठेठ हमारी देहरी तक पहुंच गया है और जिसे लेकर सालाना कर्मकांड की तरह कई दिवस भी मना लेते हैं, क्या वह हमारे ही जीवन-यापन के धतकरमों का नतीजा नहीं है? मसलन, दिनों-दिन बढ़ता-फैलता कचरे…
गांधीजी की दृष्टि और पश्चिम एशिया का संकट
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब अमीर ‘मित्र-राष्ट्र’ दुनिया का हिस्सा-बांटा कर रहे थे, भारत में महात्मा गांधी शांतिपूर्ण, अहिंसक और दोस्ताना दुनिया के भविष्य की जुगत बिठा रहे थे। क्या 80-85 साल पहले दुनिया के सत्ताधारियों, खासकर पश्चिम एशिया के…
गांधी विचार चिंतन शिविर में पारित हुआ ‘कौसानी घोषणा पत्र’ — युवाओं ने लिया रचनात्मक कार्य में भागीदारी का संकल्प
कौसानी, उत्तराखंड, 9 जून। Youth for Truth’ के तत्वावधान में 7 से 9 जून 2025 के बीच कौसानी के ऐतिहासिक अनासक्ति आश्रम में त्रिदिवसीय गांधी विचार चिंतन शिविर सम्पन्न हुआ। इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा…
शांति और अहिंसा : युद्धों से यारी के निहितार्थ
दुनिया भर में यह दौर युद्धों का है जिसमें माना जाता है कि भिन्न या विपरीत विचारों और उन पर आधारित देशों को समाप्त हो जाना चाहिए। राष्ट्रवाद, महानता आदि की आड में लड़े जा रहे युद्धों ने व्यक्तिगत स्तर…









