लोकतंत्र

18वीं लोकसभा : संसद के सलीके

पिछले महीने गठित देश की ताजा-तरीन 18वीं लोकसभा क्या सचमुच हमारे लोकतंत्र की संरक्षक हो पाएगी? उसके उद्घाटन-सत्र में ही जिस तरह के कारनामे हुए, क्या वे लोकतंत्र में भरोसा करने वाले नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरे उतरते दिखते हैं?…

आम चुनाव : मोदीजी ने क्यों पूछा कि क्या इंदौर में ज़्यादा वोटिंग नहीं होगी ?

राज्य में हुकूमत भाजपा की ही है फिर भी मोदीजी की पार्टी डरी हुई है ? डर का कारण इतना भर है कि चार जून को मोदी जी के सामने मुँह कैसे दिखाना है ! ‘बम कांड’ के कारण चर्चा…

क्या इन्दौर लोकसभा चुनाव में नोटा राजनैतिक प्रतिरोध का प्रतीक बनेगा?

भारत के आम चुनावों में भारतीय मतदाता को केवल अपना मनपसंद जनप्रतिनिधि निर्वाचित करने का ही अधिकार नहीं है भारत के प्रत्येक मतदाता को निर्वाचन में प्रत्याशियों को नापसंद करने का भी संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। भारतीय मतदाता की सामान्य…

पोहे-कचोरी भूल जाइए! ‘स्वच्छ’ इंदौर को अब इस ‘शर्म’ के लिए याद रखिए!

श्रवण गर्ग लता मंगेशकर, कर्नल सी के नायडु,उस्ताद अमीर खाँ और एम एफ़ हुसैन जैसी हस्तियों के शहर इंदौर के कोई 25 लाख मतदाता हैरान-परेशान हैं कि अब 13 मई को उन्हें क्या करना चाहिए जिस दिन चौथे चरण का…

आम चुनाव : जनहित में जारी जन-घोषणापत्र

दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, भारत भी कई संकटों का सामना कर रहा है : सत्तावादी राजनीतिक ताकतों का उदय, धार्मिक व जातीय दमन और संघर्ष, पारिस्थितिकी की बदहाली, बेरोजगारी आदि। इस बीच भारत सरकार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों की आलोचना करने वाले…

चुनाव को समझने का एक सरल गणित

राजनीति में रूचि रखने वाले लोग चुनाव के रिजल्ट को आइंसटीन के कठिन सूत्रों की तरह समझने की कोशिश करते रहते हैं और इस कोशिश में वे किसी नेता की सभा में आई भीड़, टेलीवीजन चैनल, मीडिया, व्हाट्सएप आदि के सहारे अपने-अपने अनुमान…

‘भारत रोजगार रिपोर्ट – 2024’ : युवा-रोजगार की पड़ताल

भारत अपनी बढ़ती युवा आबादी के साथ, एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। ‘मानव विकास संस्थान’ (आईएचडी) और ‘अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन’ (आईएलओ) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई ‘भारत रोज़गार रिपोर्ट – 2024’ युवाओं में रोज़गार के बहुआयामी परिदृश्य पर प्रकाश डालती है। भारत की युवा…

आम चुनाव : बच्चों के प्रति बेपरवाह राजनीति

आम चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने घोषणा-पत्र तैयार किये हैं, लेकिन अपेक्षाओं के विपरीत भारत की 42 प्रतिशत जनसंख्या, यानी युवाओं और बच्चों के मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं है। कुछ दलों के घोषणा-पत्रों में टोटकों की तरह बच्चों…

चुनाव में नहीं चुना जाता ‘पर्यावरण’

बहुत अधिक पीछे न जाकर पिछले 11-12 वर्षों में घटी प्रमुख त्रासदियों (केदारनाथ, जोशीमठ एवं सिक्किम) त‍था मौसम की चरम घटनाओं को देखते हुए अब यह जरूरी हो गया है कि सभी राजनैतिक दल आगामी लोकसभा चुनाव (2024) में पर्यावरण को महत्व दें।…

विपक्ष नहीं ! जनता की एकता से डरना चाहिए !

करोड़ों ग़रीबों को मुफ़्त का अनाज बाँटा जा सकता है पर उन्हें भारत रत्नों से विभूषित करके भी राजनीतिक विपक्ष की तरह तोड़ा नहीं जा सकता। न तो नीतीश और न ही जयंत चौधरी ही देश के असली विपक्ष का…