महेन्द्रकुमार राजनीति के द्वारा सत्ता प्राप्त करके ही सेवा की जा सकती है। यानि गांवों की सेवा कोई बहुत बड़ा बिच्छू है और उसे राजसत्ता के चिमटे से पकड़ा जाए। राजनीति में पड़े हुए कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें…
11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष हर महापुरूष का सोचने-विचारने और चिंतन का अपने निराला ढंग होता है। अपने चिंतन का जो नवनीत अपने जीवनकाल में वे समय-समय पर समाज का परोसते हैं-वह समाज-जीवन में चल रहे व्यवहार के…
विकास की अंधी दौड़ में गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार, बलात्कार, हिंसा हमारे ऊपर हावी हो रही है। लोक, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ा घटक है, गायब हो चुका है। सियासत और भ्रष्टाचार का यह गठजोड़…