Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

लोकतंत्र

सत्ता की मार्फत नहीं बदल सकेगा समाज

महेन्द्रकुमार राजनीति के द्वारा सत्ता प्राप्त करके ही सेवा की जा सकती है। यानि गांवों की सेवा कोई बहुत बड़ा बिच्छू है और उसे राजसत्ता के चिमटे से पकड़ा जाए। राजनीति में पड़े हुए कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें…

आचार्य विनोबा भावे : सच्चे अर्थ में लोकशाही कहीं नहीं है

11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष हर महापुरूष का सोचने-विचारने और चिंतन का अपने निराला ढंग होता है। अपने चिंतन का जो नवनीत अपने जीवनकाल में वे समय-समय पर समाज का परोसते हैं-वह समाज-जीवन में चल रहे व्यवहार के…

क्या लोकतंत्र के असली स्वरूप तलाशने की संभावनाएँ खत्म हो चुकी हैं?

विकास की अंधी दौड़ में गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार, बलात्कार, हिंसा हमारे ऊपर हावी हो रही है। लोक, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ा घटक है, गायब हो चुका है। सियासत और भ्रष्टाचार का यह गठजोड़…