Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे समाज

बाल दिवस (14 नवम्बर) पर विशेष देश में प्रतिवर्ष 14 नवम्बर को ‘बाल दिवस’ मनाया जाता है। सही मायनों में बाल दिवस की शुरुआत किए जाने का मूल उद्देश्य बच्चों की जरूरतों को पहचानना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और…

मुफ़्त अनाज और चुनावी रेवड़ियाँ जनता का मुँह बंद करने के लिए हैं ?

ग़रीबों को मुफ़्त अनाज देने की योजना की अवधि लोकसभा चुनावों के पहले दिसंबर में समाप्त होना थी। चूँकि ग़रीबों के हितों को लेकर सरकार लगातार चिंतित रहती है और संयोग से पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव भी इसी बीच…

दीये की लौ : साधना तथा समर्पण की मिसाल

दीया निहायत सात्विक, सौम्य, शांत और स्निग्ध रोशनी का संचार करता है। दीये की लौ साधना तथा समर्पण की मिसाल है। उसकी सत्ता शाश्वत है। अंधेरी रात जलती दीपमाला निराशा पर आशा का ध्वज फहराती है, दुख से हर्ष की…

दीपावली : पटाखों को ना कहिए

दीपावली के दौरान छोड़े गए पटाखों से वातावरण में न केवल खतरनाक रसायन घुल जाते हैं बल्कि ध्‍वनि प्रदूषण भी हमारे सुनने की क्षमता पर प्रतिकूल असर डालता है। लोगों के कान 85 डेसिबल तक की ध्‍वनि सहन कर सकते…

कुत्ते : अच्छे-खासे दोस्त, बन गए कटखन्ने

देश में हर साल करीब पौने दो करोड़ लोगों को कुत्ते काट लेते हैं| इनमें से अठारह से बीस हज़ार इंसानों को हर साल रेबीज़ Rabies होता है| रेबीज़ कुत्तों से इंसानों में होने वाला गंभीर रोग है| यह बिल्ली…

स्वार्थ की सत्ता ने खड़ा किया इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष

अंग्रेजों की नजर से ‘मिडिल-ईस्ट’ यानि ‘मध्य-पूर्व’ माने गए अरब देशों में जिस तरह की आपसी और आंतरिक लडाईयां जारी हैं, हाल का इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष उसी का एक विस्तार है। योरोप और अमरीका के अमीर देशों की तेल और दूसरे…

संविधान : सभ्यता के संरक्षण के लिए आंबेडकर के विचार

क्या हमारा संविधान रचने वालों ने कभी मौजूदा हालातों की कोई कल्पना की थी? क्या वे देख पा रहे थे कि देश सात-साढ़े सात दशकों में कहां-से-कहां पहुंच जाएगा? डॉ. आंबेडकर को शायद इसका भान था और इसीलिए वे बार-बार…

श्राद्ध-पक्ष : कौन है ‘फूलधारी’ पौधों का पूर्वज?

हिन्दू परम्परा में श्राद्ध-पक्ष पूर्वजों को याद करने की खातिर मनाया जाता है, लेकिन क्या हम कभी अपने आसपास की प्रकृति के पूर्वजों का भी स्मरण कर पाते हैं? रोटी, कपडा और मकान की बुनियादी जरूरतों के लिए परम्परा से…

नरगिस मोहम्मदी : हिरासत में जीता, शांति के लिए नोबेल पुरस्कार

अपनी राजनीति, बाजार-हितैषी चरित्र और नस्ली पूर्वाग्रहों के बावजूद नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति कभी-कभार कमाल कर देती है। इस बार उसने यह कारनामा ईरान की जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के नोबेल के लिए चुनकर…

गांधी जयंती : महात्‍मा गांधी के रचनात्मक कार्य

महात्मा गांधी ने अपने विचारों के क्रियान्वयन के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण किया था। 48 में, उनके जाने के बाद सभी को मिलाकर दो प्रमुख संस्थाएं बनाई गईं, परन्तु आज इन संस्थाओं के क्या हाल हैं? क्या आज भी…