बेगूसराय : पेप्सी बाटलिंग प्लांट से हो रहा भू गर्भ जल का दोहन
बिहार के बेगूसराय में पेप्सी के बॉटलिंग प्लांट ने पानी के संकट को गंभीर बना दिया है। भूगर्भ जलस्तर 20-30 फीट तक गिर गया है, चापानल सूख गए हैं और पानी दूषित हो गया है। हर दिन 12 लाख लीटर…
हमारा बूढ़ा होता नेतृत्व कितना बीमार है कैसे पता चलेगा ?
देश की युवा आबादी के उलट, सत्ता पर क़ाबिज़ बुज़ुर्ग नेतृत्व न केवल औसतन बीमारियों की चपेट में है, बल्कि उनकी असल स्वास्थ्य स्थिति लौह सुरक्षा और चुप्पी के पर्दे में छिपी रहती है। क्या एक बीमार नेतृत्व एक संकटग्रस्त…
International Museum Day – संग्रहालय : खामोश दीवारों के ज़िंदा दस्तावेज़
हर वर्ष 18 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस हमें यह याद दिलाता है कि संग्रहालय केवल अतीत की वस्तुओं का भंडार नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और नवाचार के मंच हैं। वर्ष 2025 की थीम—“तेजी से बदलते समुदायों…
भारत-पाकिस्तान तीन दिन का युद्ध : न तीन के, न 13 के !
भारत-पाकिस्तान की तीन-दिनी झड़प से और कुछ हुआ, न हुआ हो,आजकल की सरकारों की पोल जरूर खुल गई है। सर्वशक्तिमान डोनॉल्ड ट्रंप से लगाकर चीन, रूस, तुर्किए और युद्धरत भारत व पाकिस्तान की सरकारें कुल-जमा तीन दिन की झड़प में…
खेल, सेलेब्रिटी और ब्रांड : कोहली और बदलती क्रिकेट संस्कृति
Virat Kohli के टेस्ट सन्यास ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज का क्रिकेट केवल खेल नहीं, एक बड़ा बाजार बन चुका है। फिटनेस, निरंतर प्रदर्शन और जुनून के प्रतीक कोहली, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में नई जान फूंकी, अब…
युद्ध : विनाश का वैश्विक व्यापार
दुश्मन देश को धूल चटा देने, नेस्तनाबूद कर देने के मंसूबे आखिर हमें कहां ले जाते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं है कि पडौसी देशों के प्रति खुन्नस निकालने की यह ललक अमीर हथियार निर्माताओं की तिजोरियां भरने में लगी…
रेडक्रॉस : संघर्ष में सहारा, आपदा में आशा
रेडक्रॉस आन्दोलन मानवता की सेवा, तटस्थता और निष्पक्षता का प्रतीक है। इसकी नींव 1864 में हेनरी डयूनेंट ने युद्ध में घायल सैनिकों की पीड़ा से व्यथित होकर रखी। आज यह संस्था आपदा, युद्ध और बीमारी के समय दुनियाभर में राहत…
संघमित्रा गाडेकर : जगहें तेज़ी से ख़ाली हो रही हैं, भर जरा भी नहीं रहीं !
संघमित्रा गाडेकर (उमा जी) की चुपचाप हुई विदाई के साथ जैसे एक युग भी विदा हो गया—राजघाट की स्मृतियाँ, सर्वोदय शिविरों की ऊष्मा और खादी में लिपटी उनकी शांत उपस्थिति अब स्मरण में रह गई हैं। वे एक चिकित्सक से…
श्रमिकों के श्रम पर टिकी अर्थव्यवस्था, लेकिन हक़ और सम्मान से वंचित
एक मई को देश में मजदूर दिवस मनाया जाता है, लेकिन देश के 90 प्रतिशत से ज़्यादा श्रमिक अब भी सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और सम्मानजनक मज़दूरी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हर साल ये दिवस उनके नाम पर…
आतंकवाद को अलविदा का वक्त आ गया
पहलगाम की विभीषिका ने देश को एकजुट किया—यह सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का क्षण बन गया। पहली बार कश्मीर से लेकर दिल्ली तक, मस्जिद से लेकर संसद तक, एक सुर…









