शख्सियत

चंद्रकांत देवताले : मनुष्य की गरिमा और प्रतिरोध की कविता

चंद्रकांत देवताले (जन्‍म 7 नवंबर 1936, निधन 14 अगस्‍त 2017) हिंदी कविता के उन कवियों में से थे, जिन्होंने जीवन की भूख, श्रम और पीड़ा को अलंकारों के बिना, सधे और सधे हुए शब्दों में कहा। उनकी कविता मनुष्य की…

मारिया कोरिना माचाडो : आलू के बोरे से बदतर हुआ, शांति का नोबेल

वर्ष 1964 में साहित्य के नोबेल को ठुकराते हुए ज्यां पॉल सात्र ने तो उसे ‘आलू के बोरे’ का दर्जा दिया था, लेकिन छह दशक बाद 2025 में वेनेजुएला की जिन मारिया कोरिना माचाडो को शांति का नोबेल दिया गया…

कुमार अम्बुज : कविता जीवन पर निर्बल की सच्ची पकड़ है

कुमार अम्बुज की कविताएँ हमारे समय की बेचैनियों, विडंबनाओं और उम्मीदों की साक्षी हैं। हाल ही में कुसुमाग्रज सम्मान से सम्मानित अम्बुज ने अपने लेखन से यह सिद्ध किया है कि कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज के…

गांधी अध्‍येता, शांति की रचनाकार, समाज की साधिका : निर्मला देशपांडे

निर्मला देशपांडे—एक साधारण सी दिखने वाली असाधारण स्त्री, जिन्होंने खादी पहनकर हिंसा की आग में भी शांति के फूल बोए। भूदान से लेकर कश्मीर और गुजरात तक, वे जहां गईं, करुणा, संवाद और समर्पण की मिसाल बन गईं। उनकी जयंती…

भरत सिंह कुंदनपुर : पंचायती राज मंत्री से पंच बन गांव की सेवा करने वाले नेता का जाना

राजस्थान की राजनीति में भरत सिंह कुंदनपुर का नाम उस विरले नेता के रूप में लिया जाएगा, जिसने मंत्री पद की शोहरत छोड़ गांव की गलियों को चुना। पंच बनकर उन्होंने साबित किया कि राजनीति का अर्थ सत्ता नहीं, समाज…

क्रांति गौंड : गांव की गली से वर्ल्ड कप क्रिकेट तक

बुंदेलखंड की वीर भूमि ने एक बार फिर अपनी बेटी के साहस से इतिहास लिखा है। घुवारा की क्रांति गौंड ने गरीबी, तानों और अभावों को मात देकर क्रिकेट के मैदान पर भारत का नाम रोशन किया। जिसने कभी फटे…

पंडित छन्नूलाल मिश्रा : ठुमरी और कजरी के लोक स्वर की विदाई

बनारस घराने की ठुमरी परंपरा के जीवंत स्तंभ और पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्वर में ठुमरी, कजरी, चैती और दादरा का वह अद्वितीय संगम था जिसने शास्त्रीयता को लोकजीवन की…

सौ साल की सादगी, सेवा और संघर्ष का सफ़र – समाजवादियों के पितामह जी.जी. पारिख को अंतिम सलाम

मुंबई, 2 अक्‍टूबर। देश ने आज स्वतंत्रता संग्राम के उन अंतिम योद्धाओं में से एक को खो दिया। वरिष्ठ समाजवादी नेता, चिकित्सक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गुणवंतराय गणपतलाल राय पारिख, जिन्हें सब प्रेम से जी.जी. पारिख कहते थे, का…

ओडिशा : सौ साल पहले ओडिशा में महात्मा गांधी

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ समाज सुधार और आत्मनिर्भरता की अलख जगाने वाले महात्मा गांधी का ओड़िशा प्रवास स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक अध्याय बन गया। 1921 और 1925 में कटक में हुए उनके प्रवास ने खादी, चरखे और…

जुबीन गर्ग : समय को साधता जुबीन का संगीत

कुछ दिन पहले गुवाहाटी में गायक, संगीतकार जुबीन गर्ग की अंतिम यात्रा में उमड़े लाखों लोगों ने साबित कर दिया है कि कलाएं यदि ईमानदार, जनपक्षीय और सहज हों तो कैसा चमत्कार हो सकता है? यह चमत्कार हमें भूपेन हजारिका,…