सप्रेस फीचर्स

पाकिस्तान में एक और शरीफ…

डॉ. सुधीर सक्सेना भारतीय उपमहाद्वीप के सभी देशों में सियासत में खानदानों के वर्चस्व की परंपरा रही है। पाकिस्तान में पीएम के कूचे से इमरान खान नियाजी की बेआबरू-विदाई के उपरांत शाहबाज शरीफ के पीएम हाउस की देहरी तक पहुंचने…

बसंत के मौसम में हिमालय में चल रही है लू, तापमान सामान्य से 7-8 डिग्री अधिक

हिमालयी राज्यों में एक ओर जहां मार्च के मध्य से तापमान बढ़ना शुरू हो गया था, वहीं मार्च में होने वाली मानूसन से पहले होने वाली बरसात भी नहीं हुई। इसने पहाड़ों का मौसम बेहद शुष्क बना दिया है। राजू…

बेहाल पर्यावरण : बेहद नाकाफी है बजट

वैकल्पिक विकास पर विश्वास करने वाले व्यक्तियों, आंदोलनों और संस्थाओं के नेटवर्क ‘विकल्प संगम’ ने हाल ही में पेश किये गए देश के आम बजट का पर्यावरण की नज़र से विश्लेषण किया है।‘विकल्प संगम’ के विश्लेषण का ईशान अग्रवाल द्वारा…

कठपुतली कला : विलुप्त होती लोक कला को पुनर्जीवित करने की जरूरत

डॉ. संजीव कुमार 21 मार्च : विश्व कठपुतली दिवस विश्व कठपुतली दिवस प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। इसकी कल्पना ईरान के प्रसिद्ध पपेटियर जावद जोल्फाघरी में सन् 2000 में XVIII कांग्रेस यूनियन इंटरनेशनेल डे ला मैरियनेट (यूएनआईएमए)…

गांधी का ‘नमक सत्याग्रह’: शक्ति के खिलाफ अधिकार की लडाई

बॉम्बे सर्वोदय मंडल और गांधी रिसर्च फॉउन्डेशन अभी 12 मार्च को गुजरी 92 वीं सालगिरह के बाद, आज भी ‘नमक सत्याग्रह’ हमारे इतिहास के उस मोड की याद दिलाता है जिसने आजादी के अहिंसक आंदोलन को एक नई जीवनी प्रदान…

अब स्‍मृतियों में महका करेगी गुलाबजी की शख़्सियत

कमलेश सेन लंबे बरस तक इंदौर के अखबार नईदुनिया में बेबाकी से काम करने वाले गुलाब जैन नहीं रहे। 24 फरवरी 2022 को अमेरिका में उन्‍होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ माह से बीमारी से जूझ रहे थै। वे…

हिजाब के सवाल पर बहस; प्रेम, भाईचारे और विश्वास से ही विवाद का हल

अरुण कुमार डनायक  मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनें या न पहनें, इस मुद्दे को लेकर कर्नाटक में विरोध हो रहा है। मामला उडुपी जिले के एक कॉलेज का है। यहां से जो खबरें आ रही हैं, वे चिंतनीय हैं। पर्दा प्रथा…

लता की लोकप्रियता का मुख्य मर्म है उनका ‘गान-पन’ और स्वरों की निर्मलता

पंडित कुमार गंधर्व 60 के दशक में लता जी के फिल्म में गाने को जब 25 वर्ष पूर्ण हुए तब एक पुस्तक के लिए बाबा (कुमार गंधर्व) ने ‘अभिजात कलावती’ नाम से मराठी में यह लेख लिखा था, जिसे धर्मयुग…

क्या देश में अब विस्मृत हैं गांधी

आचार्य राममूर्ति कर्मकांडों, मूर्तियों और खोखले ‘भजनों’ के बावजूद सब जानते हैं कि एक व्यक्ति और देश की हैसियत से हम गांधी को भूल गए हैं। यदि गांधी हमारे आसपास होते तो आज हमारी ऐसी आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक…

डॉ.जे.सी. कुमारप्पा : एक विद्रोही अर्थशास्त्री

न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी भूमंडलीकरण की असफलता और जलवायु संकट के चलते संपूर्ण गांधीवाद एक बार पुनः पूर्णतया प्रासंगिक हो गया है अतएव कुमारप्पा भी उतने ही महत्वपूर्ण बन गए है। कुमारप्पा जी सही अर्थों में ग्रामीणजनों के उद्धारक या ऋषि…