Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

सप्रेस फीचर्स

जोशीमठ त्रासदी : अगली पीढ़ी के वृक्ष

अपने रहन-सहन और बसाहट के लिए समाज पर्यावरण में हस्तक्षेप करता है, कई बार इसके नतीजे दुखद भी होते हैं, लेकिन आमतौर पर वही समाज इसे दुरुस्त भी कर लेता है। करीब पांच दशक पहले जोशीमठ में ही घटी त्रासदी…

क्‍या है ‘इलेक्शन बांड’ के खतरे

जगदीप एस. छोकर हाल के वर्षों में चुनाव, खासकर संसद और विधानसभाओं के चुनाव भारी-भरकम पूंजी की दम पर लडे जाने लगे हैं। यह पूंजी ‘इलेक्शन बांड’ की मार्फत राजनीतिक दलों तक पहुंचती है। अलबत्ता, ‘भारतीय स्टेट बैंक’ से बेचे…

गैस पीड़ितों के विशिष्ट इलाज में विफल भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र (BMHRC)

एक दशक पहले तक जिस भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशिऐलटि अस्पताल के रूप में थी जहाँ बारह से ज्यादा उच्चत्तर चिकित्सा विभागों में कंसल्टेंट कार्यरत रहते थे और आठ बाह्य चिकित्सा यूनिट्स…

मध्यप्रदेश स्‍थापना दिवस : मिल-जुलकर बना मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश (छत्तीसगढ़ समेत) का गठन 1 नवम्बर 1956 को हुआ था। राज्यों के पुनर्गठन के लिए एक विशेष आयोग बनाया गया था जिसका नाम ‘राज्य पुनर्गठन आयोग’(एसआरसी) था। 1956 के पूर्व जो राज्य अस्तिव में थे उनका कोई तार्किक आधार…

शांति के सिपाही : गांधी विचारनिष्ठ तुषार बाबू

तुषार बाबू अपने व्यक्तिगत जीवन में गांधी विचार के सच्चे अनुयाई थे। अपने एक रिश्तेदार के घर भोज में दलितों के लिए अलग पंगत की व्यवस्था देख उन्होंने विरोध किया और बात न मानने पर वहां से सपरिवार लौट आये…

‘सर्वधर्म ममभाव’ और विनोबा भावे का दृष्टिकोण

डॉ. पुष्पेंद्र दुबे विनोबा जयंती : 11 सितंबर भूदान आंदोलन के प्रणेता संत विनोबा का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के गागोदा ग्राम में हुआ। उन्होंने दस वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया और सन् 1916 में…

कोराड़ी थर्मल पावर : कोयले से बिजली, बिजली से राखड़ और राखड से तबाही

हमारे यहां बिजली के लिए कोयले का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है, लेकिन उससे पैदा होने वाली राख पर्यावरण, पानी, खेती और हवा तक को खतरे में डालती है। पिछले महीने महाराष्ट्र के नागपुर में राखड के तालाब टूटने के…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : स्वतंत्रता आंदोलन में होलकर कॉलेज का योगदान

आजादी के स्वतन्त्रता आंदोलन में कई ऐसे गुमनाम युवा विद्यार्थी हैं जो अपने सीमित साधनों में भी पूरी निष्ठा और समर्पण से अपने सुख, सपनों और पढ़ाई की आहुति देकर स्वतंत्रता के यज्ञ की पवित्र अग्नि को प्रज्वलित करते रहे।…

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों का बढ़ा-चढ़ाकर न बताएं

हाल ही में जलवायु मॉडलों की मदद से किए गए कुछ अध्ययनों के निष्कर्ष प्रकाशित हुए हैं। एक अध्ययन का दावा है कि आर्कटिक वर्षा अपेक्षा से काफी पहले 2060 के दशक तक ही प्रभावी हो जाएगी जबकि एक अन्य…

बागी आत्मसमर्पण : एक प्रश्न, तीन उत्तर

दस्यु आत्म-समर्पण में विनोबा भावे के बाद जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा और अगुआई सर्वाधिक महत्वपूर्ण रही है। उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश में फैली डाकुओं की समस्या के निदान को लेकर जेपी क्या सोचते थे? उनके मुताबिक आतंक और हिंसा की…