Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Month: November 2025

हर अल्फ़ाज़ में जादू, हर तर्ज़ में एहसास — यही है उर्दू

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 9 नवंबर: विश्व उर्दू दिवस उर्दू… यह महज़ एक ज़ुबान नहीं, एक रूहानी धड़कन है — जिसमें मोहब्बत की महक है, अदब की नर्मी है, और इंसानियत की गर्माहट है। इस ज़ुबान के लफ़्ज़ होंठों से नहीं, दिल से निकलते हैं — जब कोई “जान-ए-मन” कहता है, तो उसकी आवाज़…

गांधी का ‘हिंद स्वराज’ : उथल-पुथल में उपयोगी

दुनिया के अधिकांश देशों में मची भीषण उथल-पुथल आमतौर पर लोकतंत्र के हवाले से की जा रही है। ऐसे में गांधी होते तो क्या कहते/करते? इंग्लेंड-अफ्रीका की अपनी जहाज-यात्रा में 116 साल पहले लिखी पुस्तिका ‘हिंद स्वराज’ में उन्होंने मौजूदा…

रेल सुरक्षा : सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?

भारत की रेल पटरियां देश की जीवनरेखा हैं, लेकिन बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं इस तंत्र की सुरक्षा संस्कृति पर गंभीर सवाल उठाती हैं। बिलासपुर के लालखदान में मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में 11 यात्रियों की मौत सिर्फ एक…

शिक्षा व्यवस्था : रट्टामार परीक्षा प्रणाली का रचनात्मक विकल्प

पीढियों से हमारे यहां परीक्षा की एकमात्र तरकीब वापरी जा रही है – सालभर रट्टा मारकर आखिरी कुछ दिनों में उसे उत्तर- पुस्तिकाओं में ‘उगलते’ रहने की, लेकिन क्या इससे विद्यार्थियों में प्रतिभा, समझ और रचनात्मकता विकसित होती है? यदि…

वैकल्पिक राजनीति के नेता साथी जुगल किशोर रायबीर का निधन

कलकत्‍ता, 6 नवंबर। वैकल्पिक जनराजनीति के अग्रणी नेता और समाजवादी जनपरिषद के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष साथी जुगल किशोर रायबीर (जुगलदा) का 6 नवंबर 2007 को रक्त कैंसर से लंबी जद्दोजहद के बाद निधन हो गया। उत्तर बंगाल में किसानों, दलितों…

चंद्रकांत देवताले : मनुष्य की गरिमा और प्रतिरोध की कविता

चंद्रकांत देवताले (जन्‍म 7 नवंबर 1936, निधन 14 अगस्‍त 2017) हिंदी कविता के उन कवियों में से थे, जिन्होंने जीवन की भूख, श्रम और पीड़ा को अलंकारों के बिना, सधे और सधे हुए शब्दों में कहा। उनकी कविता मनुष्य की…

कैंसर से बचाव के लिए जागरुकता की जरुरत                 

हर वर्ष 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है, क्योंकि कैंसर भारत सहित विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार भारत में जीवनभर में 11 प्रतिशत लोगों…

बढ़ते हिमस्खलन से कैसे पाएं निजात

हिमालय सरीखे नए पहाडों में बढ़ रहे हिमस्खलन बड़े संकटों की वजह बनते जा रहे हैं। कमाल यह है कि इन हिमस्खलनों को भुगतकर नवनिर्माणों पर कडाई से रोक लगाने की बजाए इन्हें विकास कहा जा रहा है और भारी-भरकम…

बिहार चुनाव : जंगल राज बनाम सरकारी नौकरी की बौछार

बिहार की राजनीति में अपराध, जाति और सत्ता का त्रिकोण लंबे समय से प्रभावी रहा है। “जंगल राज” सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और वर्चस्व के संघर्ष की परतों से जुड़ा शब्द रहा है। आज जब युवा…

मछुआरा महिलाओं का संघर्ष : सवाल जो अब भी अनसुने हैं

विश्व मछुआरा महिला दिवस पर सवाल यही है कि मछुआरा महिलाओं का नेतृत्व, उनकी आवाज़ और उनके संघर्ष आज भी मुख्यधारा के महिला आंदोलनों में जगह क्यों नहीं पाते? समुद्र किनारे खड़ी ये महिलाएं सिर्फ आजीविका नहीं, जाति, श्रम और…