ख्यात पत्रकार एवं गांधी विचारक नचिकेता देसाई का अहमदाबाद में निधन
मुखरता और बेबाकी के कारण नचिकेता ने मीडिया संस्थानों से कभी समझौता नहीं किया अहमदाबाद। जाने माने सर्वोदयी चिंतक नारायण देसाई के पुत्र ख्यात पत्रकार नचिकेता देसाई (72 वर्ष) का आज सुबह अहमदाबाद में अपने आवास पर निधन हो…
‘पेसा कानून’ के बरक्स बसनिया बांध
आज के विकास की मारामार में सरकारें और कंपनियां उन कानूनों तक को अनदेखा कर रही हैं जिन्हें बाकायदा संसद में पारित किया गया है। इन कानूनों के मैदानी अमल के लिए बनाए जाने वाले नियमों में, मूल कानून की…
केंद्रीय स्वास्थ्य बजट 2023-24 में फिर की गई आवंटन में कमी
केंद्रीय स्वास्थ्य बजट 2023-24 पर जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) का वक्तव्य नईदिल्ली, 3 फरवरी। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किये गए वर्ष 2023-24 के बजट पर जन स्वास्थ्य अभियान (JSA), जो कि स्वास्थ्य अधिकारों के लिए काम करने…
संघर्ष व जुझारूपन की सीख देने वाले साथी वंसत शिंत्रे सदैव स्मृति में बने रहेंगे
वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता कॉमरेड वसंत शिंत्रे का इंदौर में निधन इंदौर, 2 फरवरी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता कॉमरेड वसंत शिंत्रे का 86 वर्ष की आयु में 2 फरवरी 2023 को इंदौर में…
दूर देश की दास्तान : एक भारतीय सैनिक की लोमहर्षक डायरी
अंग्रेज सेना के एक मामूली सिपाही शिशिर सर्बाधिकारी की डायरी न सिर्फ ‘प्रथम विश्वयुद्ध’ के प्रत्यक्ष अनुभवों और नायाब जानकारियों को उजागर करती है, बल्कि उस दौर के इतिहास को एक भिन्न नजरिए से पेश करती है। हिन्दुस्तानी सैनिक ब्रिटिश…
दशक का सबसे महत्वपूर्ण बजट | हमारा पैसा हमारा हिसाब
भारत की अर्थव्यवस्था एक नाज़ुक मोड़ पर है। आज हम जो रास्ता चुनेंगे वो आने वाले कई सालों तक हमारे भविष्य को दिशा देगा। न केवल भविष्य, बल्कि लाखों नागरिकों का वर्तमान भी इस बजट पर निर्भर है। आशा करते…
प्रकृति से प्रेम करने वाले वैज्ञानिक होमी भाभा
‘झेन आर्ट ऑफ मोटर-साइकल मेंटीनेंस’ किताब के लेखक जिस तरह मशीनों के मिस्त्री को कविता से जोडकर देखते हैं, ठीक उसी तरह देश के ख्यात वैज्ञानिक होमी भाभा ने परमाणु-विज्ञान सरीखे गरिष्ठ विषय पर अपनी मेधा को संभवत: पेड-पौधों से…
महात्मा गांधी – कुछ बेतरतीब नोट्स
रोजमर्रा के आमफहम जीवन को फिलहाल छोड भी दें तो महात्मा गांधी की ‘जयन्ती’ और ‘पुण्यतिथि’ की सालाना कवायद पर हम आम लोग कैसा महसूस करते हैं? ‘सप्रेस’ ने यही सवाल अपने एक वरिष्ठ साथी से किया। प्रस्तुत है, अपने…
महात्मा गांधी की वसीयत के वारिस
आजकल लौट-लौटकर यह बात पुख्ता होती जा रही है कि मौजूदा संकटों से निपटने में गांधी की भूमिका अहम हो सकती है। आज के राजनीतिक हालातों को ही देखें तो गांधी की वसीयत से कुछ सुझाव सीखे-समझे जा सकते हैं।…
असमानता की ‘ऑक्सफैम’ रिपोर्ट : अमीरों पर आरोपित हों भारी टैक्स
बेशर्मी से केन्द्रित होती पूंजी और व्यापक रूप से फलती-फूलती गरीबी ने हमारे यहां जिस तरह की अश्लील गैर-बराबरी को खडा कर दिया है उससे निपटने की तजबीज आखिर कौन देगा? ‘ऑक्सफैम’ सरीखे वैश्विक एनजीओ मानते हैं कि अकूत सम्पत्ति…









