वर्ष 2023 का निवानो शांति पुरस्कार प्रख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. को दिये जाने की घोषणा
टोक्यो में 11 मई 2023 को दिया जायेगा पुरस्कार प्रख्यात गांधीवादी, सर्वोदयी नेता एवं एकता परिषद के संस्थापक और श्री राजगोपाल पी.व्ही. को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानों पीस…
हम चट्टानों की तरह मौन हो गये है, जहाँ सत्य की आवाज लौटकर नहीं आती
इंदौर, 16 फरवरी। देश के वरिष्ठ पत्रकार व चिंतक श्रवण गर्ग ने कहा कि अब हमने बोलना बंद कर दिया है, चुप रहना अपनी आदत बना चुके है। तीर्थस्थलों पर अब पालकी और बैसाखियां बढ़ती जा रही है। वे नहीं…
खेती किसानी : क्या सचमुच मिलेट के दिन फिरेंगे ?
मिलेट जैसे ज्वार बाजरा आदि के दाने बहुत छोटे आकार के होते है। इसके उलट अनाज मसलन गेहूं, चावल, मक्का आदि के दाने बड़े आकार के होते है। दोनों में यह मूलभूत अंतर है। मिलेट को फिर से मुख्य धारा…
‘यंगशाला कल्चरल वॉक’ : विभिन्न धर्मों की समझ विकसित करने की पहल
भोपाल में युवाओं के एक लोकप्रिय ‘अड्डे’ की हैसियत पा चुकी ‘यंगशाला’ उनमें विभिन्न धर्मों की समझ विकसित करने की जरूरी पहल कर रही है। इसमें युवाओं को तरह-तरह के धार्मिक स्थलों की यात्रा के अलावा, संभव हो तो उन…
शिक्षा : बाधाओं के बीच भी बेहतर प्रबंधन के रास्ते खोजने की जरूरत
पिछले 20 वर्षों में हमने अलग-अलग राज्यों में शिक्षा विभाग के 100 प्रिंसिपल सेक्रेटरी के साथ काम किया। उनमें से कम से कम 10 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में अपने राज्य में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित…
दशक का सबसे क्रूर बजट | हमारा पैसा हमारा हिसाब
जब देश के ज्यादातर लोगों को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, सरकार ने उन्हें छोड़ दिया है। लगभग सभी सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती और कुछ प्रमुख क्षेत्रों में आवंटन कम करके सरकार ने अपने ही लोगों पर घातक…
डॉ. एस. एन. सुब्बराव : विराट व्यक्तित्व के धनी
7 फरवरी : भाईजी के जन्मदिवस पर विशेष रमेश चंद शर्मा शब्द, बोल, विचार, सर्व धर्म प्रार्थना, गीत संगीत, अच्छे कर्म, साधना, मौन, श्रम कभी मरते नहीं हैं। कभी विविध कारण से धुंधले या मंद पड़ सकते है मगर जिंदा…
वन, पानी और मिट्टी का प्रबंधन भारतीय ज्ञान तंत्र और विद्या के आलोक में करने की जरूरत
भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के 42वें स्थापना दिवस पर पर्यावरणविद् राजेंद्र सिंह का उदबोधन 6 फरवरी, भोपाल । हमें वन, पानी और मिट्टी का प्रबंधन भारतीय ज्ञान तंत्र और विद्या के आलोक में करना होगा। हम यदि इसका प्रबंधन विद्या…
जोशीमठ त्रासदी : अगली पीढ़ी के वृक्ष
अपने रहन-सहन और बसाहट के लिए समाज पर्यावरण में हस्तक्षेप करता है, कई बार इसके नतीजे दुखद भी होते हैं, लेकिन आमतौर पर वही समाज इसे दुरुस्त भी कर लेता है। करीब पांच दशक पहले जोशीमठ में ही घटी त्रासदी…
दूसरों की बेहतरी के लिये जीने का पर्याय पेरीन दाजी
इंदौर, मध्यप्रदेश और देश के मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और अन्याय के विरोध में खडे होने वाले असंख्य लोगों में बेहद आदर, स्नेह से याद किए जाने वाले दाजी परिवार की पेरीन दाजी को हम से विदा हुए चार वर्ष पूर्ण…









