Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

democracy

भरत सिंह कुंदनपुर : पंचायती राज मंत्री से पंच बन गांव की सेवा करने वाले नेता का जाना

राजस्थान की राजनीति में भरत सिंह कुंदनपुर का नाम उस विरले नेता के रूप में लिया जाएगा, जिसने मंत्री पद की शोहरत छोड़ गांव की गलियों को चुना। पंच बनकर उन्होंने साबित किया कि राजनीति का अर्थ सत्ता नहीं, समाज…

स्‍मृति शेष / एक और जगदीप !

जगदीप छोकर अब नहीं रहे। एडीआर के संस्थापक और लोकतंत्र में चुनावी सुधार के लिए समर्पित इस जुनूनी व्यक्ति की विदाई केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि एक विचार और संघर्ष की भी विदाई है। छोकर ने साबित किया कि…

जब हमें नागरिकता की जिम्मेदारी का बोध होगा तब आएगा देश में लोकतंत्र

अभ्यास मंडल की ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर जगदीप झोकर का संबोधन इंदौर, 16 मई। आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर जगदीप झोकर ने कहा है कि जब हमारे देश के नागरिकों को नागरिक होने की जिम्मेदारी का…

आज के दौर में लोकतंत्र की आत्मा को ज़िंदा रखने की चुनौती : गांधी विचारक कुमार प्रशांत

भोपाल में ‘गांधी का लोकतंत्र’ विषय पर व्याख्यान भोपाल, 22 अप्रैल। “लोकतंत्र को केवल चुनाव और बहुमत तक सीमित कर देना, उसे आत्मा-विहीन बना देना है। यह जीवन की ऐसी शैली है, जो सत्य, सह-अस्तित्व, संवाद और असहमति को सम्मान…

गणतंत्र दिवस : प्रजातंत्र में पक्षधरता

प्रजातंत्र में निष्पक्ष चिंतन राज्य, सरकार और समाज को सर्वजन-हिताय बनाए रखता है, लेकिन हमारे यहां के मौजूदा पार्टी-प्रधान ढांचे ने पक्षधरता की बेहद कमजोर छवि बनाई है। नतीजे में समूचा तंत्र शिथिल होता जा रहा है। क्या हैं, पक्षधरता…

प्रजा के हित में प्रजातंत्र

अपनी शुरुआत में भले ही प्रजातंत्र ने गहरी असहमतियां झेली हों, लेकिन धीरे-धीरे वह एक ऐसी शासन-प्रणाली बन गया जिसके बिना दुनिया के अधिकांश देश अपने काम-काज नहीं चला पाते। जिन देशों में प्रजातंत्र नहीं है वहां उसे लाने के…

विपक्ष नहीं ! जनता की एकता से डरना चाहिए !

करोड़ों ग़रीबों को मुफ़्त का अनाज बाँटा जा सकता है पर उन्हें भारत रत्नों से विभूषित करके भी राजनीतिक विपक्ष की तरह तोड़ा नहीं जा सकता। न तो नीतीश और न ही जयंत चौधरी ही देश के असली विपक्ष का…

मतदान में प्रयुक्त अमिट स्याही का विज्ञान

चक्रेश जैन फर्ज़ी मतदान रोकने में ‘अमिट स्याही’ की अहम भूमिका रही है। अमिट स्याही की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे मिटाया अथवा धोया नहीं जा सकता। बैंगनी रंग की यह स्याही आम चुनाव का प्रतीक बन गई…

76वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : छोटे राज्यों का लोकतंत्र

लोकतंत्र में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका की बार-बार उजागर होती नाकामियों की एक वजह उनका मौके पर मौजूद ना रहना भी है जिसकी एक वजह प्रशासनिक इकाइयों का विशाल आाकार है। तो क्या अपेक्षाकृत छोटे राज्य ज्यादा कारगर हो सकते…

मणिपुर में मुर्दा होता लोकतंत्र

तीन मई को मणिपुर के एक शहर चूराचांदपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के खिलाफ निकाले गए विशाल जुलूस के बाद भड़की भयानक हिंसा ने अब समूचे उत्तर-पूर्व को अपनी चपेट में ले लिया है। ऐसे…