विचार

महिलाओं के politics राजनीति में आने से होगा देश का भविष्य उज्जवल

अभ्यास मंडल की 62वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में चुनाव विश्लेषक Yashwant Deshmukh यशवंत देशमुख का व्याख्यान इंदौर,16 मई। वरिष्ठ पत्रकार एवं चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख ने कहा है कि महिलाओं के राजनीति में आने से ही देश का भविष्य उज्जवल है।…

तकनीक में Artificial Intelligence ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ तो दुनिया में ‘नैतिकता’ की चुनौती सबसे बड़ी : राज्यसभा उपसभापति हरिवंश

अभ्यास मंडल, इंदौर द्वारा आयोजित ग्रीष्‍मकालीन व्याख्यानमाला इंदौर, 15 मई। वरिष्ठ पत्रकार एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि इस समय तकनीक में जहां Artificial Intelligence आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सबसे बड़ी चुनौती है, तो वहीं दुनिया के समक्ष…

‘जलवायु परिवर्तन’ के जबाव में ‘जन्म-हड़ताल’ birth strike

सत्तर के दशक से जोर पकड़ते पर्यावरण-प्रदूषण ने अब ऐसे ‘जलवायु परिवर्तन’ climate change तक की यात्रा पूरी कर ली है जिसमें माताएं बच्चों को जन्म तक देने से बचना चाहती हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध…

पर्यावरण : लालच से नाता तोड़ो, प्रकृति से नाता जोड़ो

कहा जाता है कि हम एक ग्रह और सभ्यता की हैसियत से खुद को लगातार समाप्त करने में लगे हैं। यानि हम जानते-बूझते खुद को खत्म करने के सरंजाम जुटा रहे हैं। ऐसे में समूची कायनात को बचाने के लिए…

वन्‍य जीवन : जंगलराज में सभ्यता

पढे-लिखे आधुनिक समाज में जंगल को बर्बरता, असभ्यता और पिछडेपन का ऐसा प्रतीक माना जाता है जिसमें ‘सर्वाइवल ऑफ दि फिटेस्ट’ यानि ‘सक्षम की सत्ता’ ही एकमात्र जीवन-मंत्र है, लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही है? जंगल को जानने-समझने वाले इसके…

आदिवासियों पर आधारित विकास : सच्ची खेती, सच्चा बचपन और सच्चा लोकतंत्र

स्थानीय ज्ञान, पडौस के संसाधन और समाज की देसी बनक के आधार पर विकास योजनाओं को रचा जाए तो नतीजा क्या, कैसा हो सकता है? इसे जानने के लिए भील आदिवासियों की ‘वागधारा’ जैसी संस्थाओं के काम पर नजर डालना…

गांधी दुनिया से कभी ख़त्म नहीं हो पाएँगे !

राष्ट्रपिता की एक बार फिर हत्या की जा रही है। पहले उनके शरीर का नाश किया गया। फिर उनके आश्रमों और उनकी स्मृतियों से जुड़े प्रतीकों पर हमला किया गया। अब उन्हें मुग़लों के साथ-साथ इतिहास और पाठ्यपुस्तकों से या…

लोकतंत्र की अस्मिता का सवाल : दो तारीखें-1930 और 2023

लगभग सौ साल पहले महात्मा गांधी ने ‘नमक सत्याग्रह’ के दौरान लोकतंत्र की जो उद्घोषणा की थी, आज राहुल गांधी को दी गई सजा और उसके निहितार्थों ने उसकी याद दिला दी है। आखिर राहुल गांधी का दोष क्या है?…

लोकतंत्र : सत्ता का चहेता ‘चुनाव आयोग’

केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टियों की मनमर्जी से मनचीते चुनाव आयुक्तों की बहाली पर अब सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से रोक लगने की संभावना है,लेकिन क्या यह मौजूदा राजनीतिक जमातों के चलते संभव होगा? क्या बेलगाम लोकतांत्रिक…

World Water Day : नादानी और बेईमानी से खत्म हो रहा पानी

विश्व जल दिवस पर विशेष पानी के लिए मचते हाहाकार में हम धूर्ततावर्ष अक्सर यह भूल ही जाते हैं कि इस त्रासदी की असली वजह तो हम, इंसान ही हैं और अब अपनी ही करनी के नतीजे में जलसंकट भुगत…