मुनाफे और उसकी खातिर पर्यावरण को नेस्त-नाबूद करने की इंसानी फितरत ने समुद्रों को भी नहीं छोडा है। धीरे-धीरे समुद्र भी मैले और निर्जीव होते जा रहे हैं। क्या है, इसकी वजहें? हमारी पृथ्वी पर महासागरों का विशेष महत्व है…
बीस जनवरी 2025 को होने वाली अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजपोशी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल के अलावा पर्यावरण को भी भारी संकट में डाल सकती है। ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी अरुचि पिछले कार्यकाल में ही…
10 दिसम्बर : मानवाधिकार दिवस समाज में मानवाधिकारों के होने वाले उल्लंघन के प्रति अगर मानव ही जागरूक नहीं है तो फिर इनका औचित्य क्या है? देखे तो पता चलेगा की कितने मानवाधिकारों का हनन मानव के द्वारा ही किया…
पूंजी के फलने-फूलने के तौर-तरीकों में एक है, इंसानों को इंसानियत से बेदखल करके उन्हें मशीनों में तब्दील कर देना। मानवीय गुणों से वंचित मशीन-रूपी इंसान पूंजी के उत्पादन और मुनाफा कूटने के लिए बेहद मुफीद होता है। क्या होती…
इन दिनों दुनियाभर को हलाकान करने वाले दो भीषण युद्धों में से एक,इजरायल और मध्य-पूर्व के देशों का है। इजरायल, जिसने हिटलर के हाथों अभी पिछली सदी में ही मानव इतिहास की भीषणतम त्रासदी झेली है,एक मदमस्त गुण्डे की तरह…
एल.एस. हरदेनिया 1960 के दशक में दक्षिण एशिया में एक साधारण नमक, शक्कर और साफ पानी के मिश्रण से हैजा और अन्य दस्त जनित बीमारियों को नियंत्रित करने का तरीका विकसित करने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञ रिचर्ड ए. कैश का पिछले…
अभी कुछ दिन पहले घोषित अंतरराष्ट्रीय नोबेल पुरस्कारों में दक्षिण कोरिया की हान कांग को साहित्य के नोबेल से नवाजा गया है। जीवों के प्रति दया और शाकाहार की समर्थक हान कांग को मिला यह सम्मान ‘शरीर और आत्मा, जीवन…
प्रख्यात पर्यावरणविद और वैज्ञानिक सौम्या दत्ता का व्याख्यान भोपाल। क्लाइमेट जस्टिस मुहिम, भोपाल द्वारा आयोजित “जलवायु न्याय, नीतियाँ और हाशिए के समुदाय” विषय पर परिचर्चा एकता परिषद कार्यालय, गांधी भवन भोपाल में आयोजित हुई। इसमें प्रख्यात पर्यावरणविद और वैज्ञानिक, पूर्व…
फिलिस्तीन के साथ जारी घमासान में इजरायल पानी सरीखी बुनियादी जरूरत हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है और इसमें इजरायल की सरकारी कंपनी ‘मेकोरोट’ ने मार्चा संभाला है। क्या यह किसी भी तरह से स्वीकार्य होना चाहिए? इजरायल की…
5 जून : विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष गर्म होती पृथ्वी से व्याकुल जन-जीवन की व्यथा बहुत ही चिंताजनक होती जा रही है। हमारी पीढ़ी के लिए यह एक खतरे की घंटी है। इससे भी अधिक खतरा है हमारी आने…