शख्सियत

विचार शख्सियत

भारत डोगरा : पचास साल का ‘स्वतंत्र लेखन’

पत्रकारिता में शुरुआत से ही एक विधा रही है, ‘फ्री-लांस’ या स्वतंत्र लेखन व मीडिया-कर्म की। यह लेखन बिना किसी मीडिया संस्थान से औपचारिक सम्बन्ध बनाए लगातार लिखने और जीवन-यापन करने पर आधारित रहता है। ऐसे ही एक लेखक-मित्र हैं,…

अनंत गंगोला : अंबर की यादें और शिक्षा में रचा-बसा अंबर

समाज विज्ञानी और शिक्षा के कार्य में जुटे अंनत गंगोला का युवा बेटा अंबर पिछले दिनों इस दुनिया से अपना रिश्ता निभाकर किसी और यात्रा पर निकल गया। अंबर का जीवन खुशियां और प्रेम से भरपूर था, वहीं ऊष्मा,ऊर्जा और…

यादें : देश के कालजयी हिंदी संपादक और चिंतक राजेंद्र माथुर

31 वीं पुण्‍यतिथि वह राजेंद्र माथुर का पहला तार था। छतरपुर जैसे छोटे से कस्बे में किसी नौजवान पत्रकार को नईदुनिया के प्रधान सम्पादक का तार। साइकिल उठाकर पूरे शहर के परिचितों को दिखाता फिरा | वो 1977 के चुनाव…

राजेंद्र माथुर को याद करना ज़रूरी हो गया है!

पुण्‍य स्‍मरण : नौ अप्रैल पत्रकारिता जब वैचारिक रूप से अपनी विपन्नता के सबसे खराब दौर से गुज़र रही हो ,संवाद-वाहकों ने खबरों के सरकारी स्टॉक एक्सचेंजों के लायसेन्सी दलालों के तौर पर मैदान सम्भाल लिए हों, मीडिया पर सेंसरशिप…

भगत सिंह की फांसी और महात्मा गांधी

महात्मा गांधी भी न केवल फांसी की सजा के विरोध में थे, वरन उन्होंने हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त, क्रांतिकारियों, नजरबंद लोगों की रिहाई की मांग लार्ड इरविन से की, जिन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग लगाए या…

साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई के प्रकाश पुंज भगतसिंह

देश का साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ रहा है। जो काम कभी अंग्रेजी हुकूमत करती थी वही काम इस समय देश का शासकवर्ग कर रहा है। देश का साम्प्रदायिक वातावरण बिगाड़ने, लोगों को बांटने और शासन करने की साजिशें परवान चढ़ रही…

वरिष्‍ठ गांधी विचारक जयवंत मठकर नहीं रहे, सर्वोदय समाज ने एक सजग और सहज कार्यकर्ता खो दिया

वर्धा। सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान के पूर्व अध्यक्ष जयवंत गंगाराम मठकर का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे पिछले दो महीने से बीमार थे। उन्होंने सोमवार 14 मार्च 2022  को पुणे में अंतिम सांस ली, मंगलवार सुबह…

अब स्‍मृतियों में महका करेगी गुलाबजी की शख़्सियत

कमलेश सेन लंबे बरस तक इंदौर के अखबार नईदुनिया में बेबाकी से काम करने वाले गुलाब जैन नहीं रहे। 24 फरवरी 2022 को अमेरिका में उन्‍होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ माह से बीमारी से जूझ रहे थै। वे…

गांधी की कस्तूरबा

ऐसा कहा और माना जाता है कि मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा गांधी में तब्दील होने का अधिकांश श्रेय उनकी पत्नी कस्तूरबा को जाता है। कैसा था, गांधी के संग-साथ का उनका जीवन? कैसे वे खुद कस्तूर बाई से बा…

गाँधी विचार के संवाहक एवं जाने माने शिक्षाविद रमेश थानवी का निधन

जयपुर । जाने-माने शिक्षाविद्, गांधी-विचार के संवाहक, प्रौढ़ शिक्षा का अलख जगाने वालों में अग्रणी, साहित्य और दर्शन के अध्येता रमेश थानवी का 12 फरवरी 2022 को जयपुर में सुबह देहांत हो गया। वे 78 वर्ष के थे। देश में शैक्षिक…