‘पेसा’ की पहल से बढ़ेगा जनजातियों का गौरव
लगभग तीन दशक पहले भारत की संसद ने आदिवासी इलाकों के लिए एक बेहद जरूरी कानून ‘पेसा’ पारित किया था। इसमें आदिवासी समाज को उनकी पारंपरिक स्वायत्तता और उसी के मुताबिक आसपास के संसाधनों को वापरने की अनुमति दी गई…
विविधता में एकता ही सर्वश्रेष्ठ भारत की पहचान
राष्ट्रीय एकता केवल भौगोलिक सीमाओं का मेल नहीं, बल्कि विविधताओं के बीच बंधुत्व, सहिष्णुता और साझा मूल्यों की भावना है, जो भारत को “एकता में अनेकता” का जीवंत उदाहरण बनाती है। सरदार पटेल के एकीकरण से लेकर बाबा आमटे की…
वन अधिकार कानून और वन संरक्षण अधिनियम आदिवासी हितों का पूरक
वनवासियों के आवास अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जिससे वनवासी समुदाय को आवास का…
बालाघाट में आदिवासी समाज का दो दिवसीय ‘घेरा ड़ालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू
वनग्रामों के विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्ष का आह्वान बालाघाट, 8 अक्टूबर। वन ग्रामों को विस्थापित किए जाने सहित जल, जंगल, जमीन और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल के बैनर तले आज से दो दिवसीय घेरा डालो- डेरा…
सार्वजनिक संस्थानों में नौकरियों की आउटसोर्सिंग शोषण का जरिया नहीं बन सकती : सुप्रीम कोर्ट
राज कुमार सिन्हा बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले संविदाकर्मियों का मुद्दा गर्मा गया है। कुछ दिन पहले पटना में संविदा कर्मचारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में अपनी नौकरी पक्की करने और बकाया वेतन की मांग को लेकर, लगभग…
विकास : बीत चुका है, हिमालय को सुनने का समय
मौजूदा विकास की बेहूदगी से किसी तरह अब तक बचे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के वाशिंदे चीख-चीखकर गुहार लगा रहे हैं कि अगले दस-पंद्रह सालों में उनके राज्यों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। आप यदि ध्यान से इन दिनों आने…
पंजाब : बाढ़ के समय बांध से पानी छोड़ा जाना काल बन गया
भारत में बांधों को सिंचाई, बिजली और बाढ़ नियंत्रण का जरिया माना जाता है, लेकिन हालिया अनुभवों ने उनकी सीमाएँ उजागर कर दी हैं। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की बारिश से भाखड़ा, पौंग और रंजीत सागर बांधों से छोड़े गए पानी…
रेत खनन और पर्यावरणीय मंजूरी पर सर्वोच्च फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना नदी पुनर्भरण अध्ययन के जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। पर्यावरणीय स्वीकृति तभी दी जा सकती है, जब जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में नदी की वार्षिक प्राकृतिक पुनर्भरण क्षमता का आकलन शामिल हो। सुप्रीम कोर्ट…
World Indigenous Day : मौजूदा विकास के विपरीत है, आदिवासी जीवन
आदिवासी समाज की बदहाली को देखना-समझना चाहें तो आसानी से उस संवेदनहीनता पर उंगली रखी जा सकती है जिसे लेकर सत्ता, सेठ और समाज आदिवासियों को अपनी तरह के विकास की चपेट में फांसने में लगे हैं। कमाल यह है…
प्राकृतिक व जैविक खेती ही समाधान
देश के गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘प्राकृतिक’ और ‘जैविक’ खेती की पैरवी करते हुए खुद को इन पद्धतियों का प्रशंसक बताया था। केन्द्रीय कृषि बजट के 70 फीसदी को उर्वरक सब्सीडी में लगाने वाली सरकार के वरिष्ठ…









