Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Year: 2021

पद्मश्री प्रो. रामजी सिंह, जिन्होंने गांधी के चिंतन और दर्शन को साक्षात उतारा है

2020 में भारत सरकार ने प्रो.रामजी सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा की थी। 8 नवंबर 21 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने पद्म सम्मान से अलंकृत किया। उनका व्यक्तित्व सभी सम्मानों से सर्वोपरि है। गांधी विचार और…

लॉक डाउन के 233वें दिन के बाद की पहली दिवाली!

हम एक बार फिर दीपावली से रूबरू हैं। हमारे भीतर का लॉक डाउन अभी भी जारी है। ’न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट पर यक़ीन करना हो तो भारत में (सरकारी दावे 4.58 लाख के मुक़ाबले) कोरोना के मृतकों की कुल…

बांधों से बेहाल हिमालय

साठ के दशक में ‘नए भारत के तीर्थ’ माने गए बड़े बांध आजकल किस तरह की त्रासदी रच रहे हैं, इसे देखना-समझना हो तो केवल उत्तराखंड की यात्रा काफी होगी। गंगा और उसकी अनेक सहायक नदियों पर जल-विद्युत, सिंचाई और…

पर्वों पर पटाखे

दीपावली पर विशेष पहले जिन पटाखों की पूछ-परख पर्व-त्यौहारों पर ही होती थी, आजकल उन्हें आए दिन फोडने के अवसर खोजे जाने लगे हैं। क्या हमारे समाज में इन पटाखों की अहमियत पहले भी ऐसी ही थी? क्या लंका से…

विचार : गांधी की गति न्यारी

गांधी के विचारों की प्रासंगिकता हमारे समय में लगातार, रोज-ब-रोज बढती जा रही है। उनके विचार जो उनके ही मुताबिक उनके व्यवहार में से निकले थे, अब बहुत जरूरी होते जा रहे हैं। क्या इन्हें आज की दुनिया अंगीकार करना…

प्रकृति : समुद्री सम्पदा की समाप्ति में लगी जेलीफिश

प्रकृति के साथ इंसानी रिश्तों की बदहाली आए दिन हमें भीषण प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भोगना पडती हैं, लेकिन इंसान इसे कभी सुधारने की कोशिश नहीं करता। करोडों साल के इतिहास में प्रकृति खुद अपने को बार-बार समाप्त और…

डॉ. अभय बंग को वर्ष 2021 का ‘ह्यूमैनिटेरियन सोल्जर’ पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा

वर्धा (सप्रेस)। बोडोलैंड के जनक उपेंद्रनाथ ब्रह्मा ने असम में बोडो जनजातियों के उत्थान और अधिकारों के लिए एक आंदोलन शुरू किया जिसके परिणामस्वरूप असम के भीतर बोडो भूमि का निर्माण हुआ। भारत के आदिवासियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण…

सुब्बराव गांधीवादी तो थे पर आंदोलनकारी नहीं

मूलतः कन्नड़ भाषी पर अनेक देसी-विदेशी भाषाओं के जानकार सुब्बराव जी की विशेषता यही थी कि वे लगातार चलते रहते थे। किसी एक स्थान पर कम और सभी स्थानों पर सदैव उपलब्ध रहते थे। मध्य प्रदेश में मुरैना ज़िले के…

डॉ. एस.एन.सुब्बराव : जिन्‍होंने जीवन में थकना और रुकना सीखा ही नहीं

बहुत सीमित संसाधनों में भी जीवन निर्वाह हो सकता है, यह भाई जी से सीखा जा सकता है। दो खादी के झोलों में दो जोड़ कपड़े, एक टाइपराइटर, डायरी, कुछ किताबें, कागज और पोस्टकार्ड यही उनका घर था। हमेशा हाफ…

एसएन सुब्बराव : गीत गाने वाले एक सिपाही का अवसान

श्रद्धांजलि गांधी विचार को आत्मसात करके जीने और उससे लगातार समाज को सम्पन्न करते रहने वाली पीढी के एक अप्रतिम व्यक्ति भाईजी यानि एसएन सुब्बराव (93 वर्ष) हाल में हमसे सदा के लिए विदा हो गए हैं। प्रस्तुत है,‘सप्रेस’ के…