अमेज़न के जंगलों में पारा प्रदूषण का बढ़ता खतरा
शोधकर्ताओं को वन्यजीवों में मिथाइल मर्करी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सान्गबर्ड की तीन प्रजातियों में 12 गुना अधिक पारा पाया गया। इसी तरह 10 में से 7 ब्लैक-स्पॉटेड बेयर आई पक्षी में इतना अधिक पारा मिला जो उनकी…
आकाश से बर्फ रूप में गिरती ‘गंदगी’
आसमान से बर्फ के गोले या सिल्लियां गिरने की घटनाएं दुनिया में कई स्थानों पर हुई है। बर्फ के गिरे गोलों या सिल्लियों का वजन 5-7 किलो से लेकर 25-30 किलो तक आंका गया है एवं रंग सफेद, नीला, हरा,…
आधी सदी का बांग्लादेश
अभी, करीब डेढ महीना पहले अपनी आजादी की आधी शताब्दी मना चुके बांग्लादेश ने 1971 में अपने गठन के साथ दो-राष्ट्रवाद के उस बेहूदे सिद्धांत को ही खारिज कर दिया था जिसने भारत विभाजन सरीखे तीखे, दर्दनाक संकट पैदा किए…
अंतर्राष्ट्रीय : देशों की विदेश नीतियां
अकूत मुनाफा कूटने के लिए दुनियाभर को एक मानने वाले, नब्बे के दशक के भूमंडलीकरण के बाद, अब लगभग सभी देशों में राष्ट्रवाद की हवा चली है। ऐसे में चीन अपनी पूंजी और सामरिक ताकत के साथ दुनियाभर को घेरने…
झुलसती धरती : संवेदनशीलता ही इस धरती को बचा सकती है
हमारे इस्तेमालवादी असंवेदनशील रवैये ने इस धरती का जितना नुकसान किया है, उतना शायद ही किसी आकस्मिक आपदा ने किया हो। गौरतलब है कि महान वैज्ञानिक स्टीवन हॉकिंग इंसान की हिंसक और आक्रामक प्रकृति को ही धरती के विनाश का…
अफगानिस्तान : तेल की तलब से पनपता आतंकवाद
तेल की अपनी हवस की खातिर इराक में ‘नरसंहार के हथियारों’ की फर्जी अफवाह फैलाकर जिस तरह अमरीका की अगुआई में एक समूचे राष्ट्र को नेस्त-नाबूद किया गया, हाल में अफगानिस्तान से अमरीकी सेना की वापसी की कहानी भी उससे…
आज का अफगानिस्तान दुनिया के हर लोकतांत्रिक नागरिक के लिए शर्म का विषय है
वरिष्ठ गांधीजनों ने जारी किया संयुक्त बयान नईदिल्ली । 13 सितंबर । देश की प्रतिनिधि गांधीवादी संस्थाओं की ओर से यहां जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि कभी भारत का हिस्सा रहे अफगानिस्तान को हमें किसी दूसरे…
गेल ऑमवेट : एक अनूठे व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि
पिछले दिनों देश की प्रमुख समाजशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता गेल ऑमवेट का निधन हो गया है। ऑमवेट ने भारतीय समाज के हर उस पहलू के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जिसने समाज के कमजोर वर्गों को आवाज़ दी…
जी20 देशों की 73 फ़ीसद जनता मानती है पृथ्वी महाविनाश के मुहाने पर
“दुनिया के सबसे धनी देशों के रहने वाले अधिसंख्य लोग भी ठीक वहीं बात महसूस करते हैं,जो हम कर रहे हैं। वे धरती की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और इसे बचाना चाहते हैं।मुझे लगता है कि इससे दुनिया भर…
वैश्विक पर्यावरण : जलवायु परिवर्तन से बढ़ेंगे चक्रवात
विडंबना है कि मानव सभ्यता की समाप्ति का संकट खुद मानव-निर्मित हो गया है। मसलन – लगातार बढ़ते चक्रवात, वायुमंडल और समुद्र के बढ़ते तापक्रम की वजह से पैदा हो रहे हैं और तापक्रम बढ़ने की वजह रोजमर्रा की मानवीय…








