विश्व जल दिवस पर विशेष कूड़न, बुढ़ान, सरमन और कौंराई थे चार भाई। चारों सुबह जल्दी उठकर अपने खेत पर काम करने जाते। दोपहर को कूड़न की बेटी आती, पोटली में खाना लेकर। एक दिन घर से खेत जाते समय…
कोरोना काल में देश के 14 करोड़ से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है। इनमें समाज के हाशिये पर रहने वाले समुदायों की आजीविका सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इन्हीं में सेक्स वर्कर्स समुदाय भी शामिल है। प्रस्तुत…
आप चाहें, न चाहें, ‘डिजिटल मीडिया’ धीरे-धीरे सभी की बुनियादी जरूरत बनता जा रहा है। लेकिन क्या महिलाओं की हमारी आधी आबादी तक भी विज्ञान का यह चमत्कार पहुंच पा रहा है? क्या वे उतनी ही आसानी से ‘स्मार्ट-फोन’ की…
नर्मदा और गंगा की तरह कश्मीर घाटी भी ‘जीवित इकाई’ मान ली गई होती तो वह इनके साथ मिलकर लोक-समाज से क्या कहतीं? प्रस्तुत है, कश्मीर और नर्मदा घाटी को जानने-समझने के बाद उनकी तरफ से लोक-समाज को लिखा गया…
अजीब बात है कि अपने आसपास रहने-बसने वाले घुमन्तु लोगों के बारे में आम समाज निरा अनजान है और उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा अपराधिक जातियों की तरह पहचानता है। कौन हैं, ये ‘विमुक्त’ और ‘घुमन्तु’ समुदाय? आम समाज के कितने लोगों को…
पिता की सम्पत्ति में बेटियों की बराबरी की हिस्सेदारी को लेकर 2005 में बने कानून को हाल में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से पुष्ट किया है। इस कानून को लेकर तरह-तरह की नकारात्मक- सकारात्मक बातें उठ रही हैं। ऐसा नहीं…
हमारे यहां समाज, संस्कृति और श्रम की एक धुरी हस्तशिल्प भी रही है। इसीलिए आजादी के पहले और बाद में भी हथकरघा उत्पादन स्थानीय संसाधनों के उपयोग, निजी श्रम और आपसी लेन-देन की खातिर अहमियत पाते रहे हैं। अब हस्तशिल्प…
‘सिविल सोसाइटी’ के बढ़ते ‘संस्थानीकरण’ के दौर में काम को ‘सुव्यवस्थित’ रूप से करने का चलन बढ़ा है। इसका अर्थ यह है कि ‘सिविल सोसाइटी’ अब एक सुरक्षित माहौल में काम करना चाहती है, पर दबे-कुचलों की आवाज़ उठाना सुरक्षित…
सूर्य ग्रहण और चन्द्रग्रहण पर एक पिता का पुत्रवधू को लिखा एक खुला पत्र अभी हाल ही में पिछले माह 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच तीन ग्रहण – एक सूर्य ग्रहण और दो चन्द्रग्रहण पडे। इन ग्रहणों…