वैश्विक पर्यावरण

राजस्थान : गायब होते गोचर की लड़ाई

राजस्थान हमारे देश में पशुपालन के लिए जाना जाता है, लेकिन आजकल इसी पशुपालन के लिए सबसे जरूरी चारागाहों को लेकर भारी बवाल मचा है। एक तरफ, जमीन की लगातार बढ़ती ‘भूख’ है तो दूसरी तरफ, दुधारू, खेतिहर पशुओं के…

बिजली के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों को मिले बढ़ावा

थर्मल इंजीनियरिंग के महत्व को समझाने के लिए प्रतिवर्ष 24 जुलाई को ‘राष्ट्रीय थर्मल इंजीनियरिंग दिवस’ मनाया जाता है। थर्मल इंजीनियरिंग मैकेनिकल इंजीनियरिंग का ही एक ऐसा हिस्सा है, जिसमें ऊष्मीय ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। आज दुनियाभर में…

बाढ़ : विनाश के पीछे विकास की लालसा

वर्षा, अतिवृष्टि, नदी में उफान, नदी का अपने तट से बाहर निकलना, यह सब सामान्य प्राकृतिक घटनाएं हैं। हमें पानी के बहाव के साथ जीना सीखना होगा। बाढ़ से जुड़े ये दोनों झूठ एक बड़े सच को छुपाते हैं कि…

केदारनाथ धाम : आपदा का एक दशक

एक दशक पहले केदारनाथ मंदिर के ऊपर से उठे बवंडर ने मंदिर समेत पूरी केदार-घाटी को तहस-नहस कर दिया था। जैसा कि होता है, दुर्घटना के प्रभाव में तरह-तरह के सुझाव-सलाहें भी आईं जिनका मूल स्वर तीर्थ-यात्राओं को पर्यटन बनाए…

बद्रीनाथ–धाम : आस्था की जगह पर्यटन

आजकल धार्मिक-पौराणिक स्थलों को ‘पिकनिक स्पॉट’ में तब्दील करने की बड़ी हुलफुलाहट मची है और इस उत्साह में उत्तर भारत के अनेक मंदिरों, तीर्थ-स्थलों को बदला और अनेकों को चिन्हित किया जा चुका है। हमारे चार धामों में से एक,…

अमरनाथ यात्रा का फिर एक बार पर्यावरण प्रबंधन करेगा, इंदौर का स्टार्टअप ‘स्वाहा’

पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ता इंदौर का सस्टेनेबिलिटी और वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप ‘स्वाहा’ फिर एक बार दुर्गम हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित बाबा अमरनाथ की गुफा यात्रा को पूर्णत: पर्यावरण सम्मत बनाएगा। इस हेतु उसका चयन पिछले वर्ष…

भोपाल त्रासदी : आपदा के दौरान पैदा हुए लोगों में आठ गुणा ज्यादा है कैंसर का जोखिम

गैस रिसाव के बाद गर्भपात की दर में चार गुना वृद्धि हो गई थी। साथ ही मृत जन्म और नवजात मृत्यु दर का जोखिम भी बढ़ गया भोपाल त्रासदी एक ऐसी भूल, जिसका सजा दशकों से पीड़ित झेल रहे हैं।…

पर्यावरण बिगड़ने के दुष्प्रभाव से चिंतित विश्व

जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता रहेगा और बढ़ते तापमान से सूखे की स्थिति पैदा होगी। जिससे मीठे पानी के महत्वपूर्ण स्रोत प्रभावित होंगे। संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनईपी) का मानना है कि पानी के बाद रेत सबसे…

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (5जून) : सूचना प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय खतरे

पिछली दो-ढाई सदी में सूचना – प्रौद्योगिकी ने कमाल की प्रगति की है, लेकिन उसी अनुपात में इस तकनीक ने जैविक, इंसानी जीवन के लिए खतरे भी खडे कर दिए हैं। क्या हैं ये खतरे? और किस तरह से मानव…