वैश्विक पर्यावरण

सूरज की सौर ऊर्जा

मानव सभ्यता प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर उन्नत तो हुई है, किन्तु हमारी ऊर्जा की खपत भी बढ़ती जा रही है। यदि इसी तरह ऊर्जा के परम्परागत साधनों का उपयोग बढ़ता गया, तो भविष्य में भयानक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा।…

आर्द्रभूमि से होता है, जलवायु संकट पर नियंत्रण

‘वेटलेंड’ यानि आर्द्रभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले अपने आसपास के ताल-तलैया, विशाल जलाशय और तटीय इलाके हजारों हजार जैविक इकाइयों का ठिकाना भर नहीं होते, बल्कि उनके भरोसे आज के सबसे बड़े जलवायु परिवर्तन के संकट से भी…

पर्यावरण के खतरों से निरंतर आगाह करने में मीडिया की भूमिका महत्‍वपूर्ण

बदनावर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन बदनावर, 25 जनवरी। पर्यावरण डाइजेस्ट मासिक पत्रिका के प्रकाशन के गौरवशाली 37 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार शाम यहां चंद्रलीला पैलेस में बदनावर नगर परिषद के सहयोग से पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन…

जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार जीवनशैली

सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…

अंतरराष्‍ट्रीय : पनामा में पर्यावरण के लिए प्रतिरोध

मौजूदा विकास की अवधारणा के चलते दुनियाभर में प्रतिरोध हो रहे हैं। हाल में मध्य अमेरिकी देश पनामा Panama में तांबे की खदान के विरोध में आम लोगों ने प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रपति को अपनी बात समझा…

वायु प्रदूषण : देशव्यापी प्रदूषित हवा का कहर

दिल्ली की तरह अब कोलकाता से भी वायु प्रदूषण की भयावह खबरें आने लगी हैं। जबकि यहां पराली जलाए जाने से वायु प्रदूषित नहीं हो रही है। यहां हवा में प्रदूषण की मात्रा 175 के आंकड़े पर आ गई है।…

COP28 : पाखंड का पर्यावरण

‘कॉप – 28’ : 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2023 पर्यावरण को लेकर सत्तर के दशक में उभरी राजनीतिक सत्ताओं की चिंता अब पाखंड में तब्दील होती जा रही है। तरह-तरह के वैश्विक सम्मेलनों में दुनियाभर के राजनेता भांति-भांति के दावे-वायदे…

खेती से खत्म होता पानी : उरुग्वे का उदाहरण काफी है

इंसानी वजूद के लिए जरूरी हवा, पानी और भोजन की त्रयी में से पानी तेजी से विलुप्त होता जा रहा है। वजह है, नए आधुनिक तरीकों से होने वाली खेती और उद्योग। क्या होता है जब बुनियादी मानवीय जरूरतों को…

पानी को सहेजने की परम्परा

इंसान के जिन्दा रहने के लिए हवा, पानी और भोजन अनंत बुनियादी जरूरतें हैं और इसीलिए आजकल के व्यापार-धंधे में इन जिन्सों की भारी पूछ-परख है। इन तीनों में से सिर्फ पानी को ही देखें तो क्या पता चलता है?…

We 20: जन सम्मेलन ने अधिकारों की सुरक्षा में प्रयासों को मजबूती देने का संकल्प लिया

‘लोकतंत्र की जननी’ में लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा विफल हुई नई दिल्ली, 20 अगस्‍त। We20, G20 पर जन सम्मेलन, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों से 70 संगठनों ने सामूहिक रूप से आयोजित किया था, उत्साह और ऊर्जा के साथ समाप्त…