मंथन अध्ययन केंद्र ने की अंतर्देशीय जलमार्ग कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति पर केंद्रित रिपोर्ट जारी सप्रेस डेस्क। सप्रेसमीडिया.इन भारत में लगभग 14,500 किलोमीटर नौगम्य अंतर्देशीय जलमार्ग और करीब 7,517 किलोमीटर समुद्र तट है जल परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य…
कोरोना की महामारी के पिछले एक-डेढ साल ने हमें अपनी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, लापरवाही और बदइंतजामी के साथ-साथ लोकतंत्र के मौजूदा स्वरूप से भी दो-चार कर दिया है। क्या हम लोकतंत्र के इसी रूप की कल्पना करते थे जिसमें सत्ता…
राजनीतिक दांव-पेंच से दूर सारे मोर्चों पर एक साथ काम शुरू हो, सामाजिक व्यवस्थाएं अस्पतालों पर आ पड़ा असहनीय बोझ कम करें, युद्ध-स्तर पर वैक्सीन लगाई जाए तो कोरोना की विकरालता कम होने लगेगी। जानकार कह रहे हैं कि तीसरी…
चिंता का मुद्दा यहाँ यह है कि स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में उपजी मौजूदा आपातकालीन परिस्थितियों में जब देश का प्रत्येक नागरिक साँसों की लड़ाई लड़ रहा है, तब क्या न्यायपालिका को एक दिन के लिए भी अवकाश पर…
बडों की तरह जघन्य अपराध करते बच्चों की समस्या हमारे यहां नई नहीं है। कानून और अपराध-शास्त्र के आधार पर उससे निपटने की तजबीज भी बताई जाती रही है, लेकिन क्या ऐसा करने से कोई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं?…
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, विपक्ष के ऐतराज, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जतायी निराशा देश इस वक्त महामारी से जूझ रहा है, वहीं बीते कुछ दिनों से देश में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण की खूब चर्चाएं हो रही हैं। विपक्ष के…
तरह-तरह की वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और समाजशास्त्रीय शोधें चीख-चीखकर बता रही हैं कि हमारी मौजूदा जीवन पद्धति दरअसल आत्महंता है और इसे बरकरार रखा गया तो बहुत जल्द मानव जाति को अपने अस्तित्व के संकट से दो-चार होना पडेगा। क्या हम…
चहुंदिस फैली कोरोना की मारामार में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि आखिर इस व्याधि से कैसे निपटा जा सकता है? हमारे समाज में ही कुछ लोग हैं जो अपने कामकाज से इसके संकेत देते रहे हैं। कोरोना वायरस…
इस कठिन समय में इस्तीफ़े की मांग करने की बजाय देश का नेतृत्व करते रहने के लिए प्रधानमंत्री को इसलिए भी बाध्य किया जाना चाहिए कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी अपने स्थान पर किसी और विकल्प की स्थापना के लिए…
प्रकृति को ‘प्रसाद’ मानने और उसी लिहाज से उसके ‘फलों’ का उपभोग करने की नैतिक, आध्यात्मिक निष्ठा के अलावा बीसवीं सदी में रचा गया हमारा संविधान भी पर्यावरण को लेकर खासा सचेत है। उसके कई हिस्से जल, जंगल, जमीन, वायु…