Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

कोरोना-काल में भी जारी है, दवा कंपनियों के मुनाफे की हवस

कोविड-19 महामारी के दौर में कई तरह की पोल-पट्टियों के खुलासा होने में दवा कंपनियों के मुनाफे की हवस भी शामिल है। थोडी गहराई से देखें तो हमारा स्वास्थ्य चिकित्सकों की बजाए उन दवा कंपनियों के नुमाइंदों के हाथ में…

किसान आंदोलन : कैसा हो, ‘एमएसपी’ कानून?

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीनों से धरना देकर बैठे किसानों की दो कानूनों और एक कानून में संशोधन को वापस लेने के अलावा एक महत्वपूर्ण मांग सभी 23 फसलों पर ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ लागू करने का कानून बनाने की…

‘…बर्लिन के उस लेखक ने तो कमाल का सिद्धांत ही बना दिया है …’

फलस्तीन-इसरायल विवाद फलस्तीन-इसरायल विवाद पर प्रारंभ से महात्मा गांधी की नजर थी और वे हर संभव मौके पर उस विवाद को एक रचनात्मक मोड़ देने की कोशिश करते रहे थे. अपने देश की आजादी की अनोखी लड़ाई का नेतृ्त्व करते…

पानी से परिवहन : फर्जी दावों की पतवार से धकेले जा रहे राष्‍ट्रीय जलमार्ग

सडक, रेल और वायु मार्गों के अलावा अब हमारी सरकार पारंपरिक जल-परिवहन के लिए उत्साहित हुई है। कहा जा रहा है कि पानी के छोटे-बडे जहाजों से माल ढुलाई सस्ती हो जाएगी। सवाल है कि क्या शुरुआती तैयारी के लिहाज…

लक्षद्वीप : ‘स्वर्ग’ पर संकट थोपने की योजनाएं

प्रकृति के अद्भुद सुंदर इलाकों को पर्यटन के नाम पर उजाडने का हमारा विकास-वादी चलन अब सुदूर लक्षद्वीप में पांव पसार र‍हा है। आदिवासी बहुल शांत और समझदार लोगों की कुछ हजार की बसाहट अब विकास-वादियों की आंख में खटकने…

“ उनसे मेरी गहरी मित्रता भी मुझे न्याय देखने से रोक नहीं सकती है….”

संदर्भ : फलस्तीन(हमास)-इस्रायल युद्ध हाल के फलस्तीन(हमास)-इस्रायल युद्ध के बाद अब इस वैश्विक समस्या के हल की गरज से तरह-तरह की आवाजें उठने लगी हैं। महात्मा गांधी होते तो वे इस मसले पर क्या कहते? प्रस्तुत है,गांधी के नजरिए से…

महामारी में मजूरी : बच्चों की मजबूरी

‘अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस’ (12 जून) समाज के विभिन्न तबकों की तरह बच्चों पर भी कोविड-19 का मारक प्रभाव पडा है। कई जगहों पर लॉकडाउन और उसके बाद बच्चों को अपने परिवारों के भरण-पोषण में हाथ बंटाना पड रहा है।…

लाल बहादुर वर्मा: ‘जन साहित्य और जन इतिहास का सबसे बड़ा बाबू’ और ‘मास्टर’

वे तरह तरह के खनिजों से बने व्यक्ति थे. अपने होने की कुछ मिश्र धातुयें उन्होंने खुद बनाई थीं. जैसे प्रकृति प्रेम, पर्यावरण बेचैनी, उपभोग की अति की निरर्थकता उन्हें ‘मठी मार्क्सवादियों’ से अलग करती है. इसलिये उनकी मुख्य रुचि…

जरूरी है, तम्बाकू के अवैध व्यापार पर नकेल

दुनियाभर में तम्बाकू और उससे बने विभिन्न उत्पादों का उपभोग एक मानव निर्मित त्रासदी पैदा कर रहे हैं। इसमें तम्बाकू का अवैध व्यापार बढौतरी करता है। कोविड-19 महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन ने तम्बाकू के वैध व्यापार पर तो…

Opinion : खेल के साथ खेल करने का अपराध

सुशील कुमार ने अपनी सफलता को मनमानी का लाइसेंस समझ लिया। खेल के सारे व्यापारियों ने उसकी इस समझ को सुलझाया नहीं, भटकाया-बढ़ाया। अब हम देख रहे हैं कि सुशील कुमार पर हत्या का ही आरोप नहीं है बल्कि असामाजिक-अपराधियों…