शख्सियत

हान कांग : शाकाहार की समर्थक को साहित्य का नोबेल

अभी कुछ दिन पहले घोषित अंतरराष्ट्रीय नोबेल पुरस्कारों में दक्षिण कोरिया की हान कांग को साहित्य के नोबेल से नवाजा गया है। जीवों के प्रति दया और शाकाहार की समर्थक हान कांग को मिला यह सम्मान ‘शरीर और आत्मा, जीवन…

इंदिरा की नज़रों में जेपी की हैसियत आम आदमी जितनी ही थी ?

लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) : 11 अक्टूबर जन्मदिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) का आज (ग्यारह अक्टूबर) जन्मदिन है। तीन दिन पहले आठ अक्टूबर को उनकी पुण्य तिथि थी। सोचा जा सकता है कि जेपी आज अगर हमारे बीच होते तो…

क्या दलीय लोकतंत्र से आगे कोई रास्ता नहीं है?

जयप्रकाश नारायण क्या वर्तमान दलीय लोकतंत्र का कोई विकल्प हो सकता है? और यदि हो सकता है तो उसका स्वरूप कैसा होगा? इस सिलसिले में प्रस्तुत है, ‘सप्रेस’ के भंडार में से देश के मूर्धन्य नेता, स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी स्व. श्री…

Sonam Wangchuk : लद्दाख से उठी हिमालय की आवाज

महात्मा गांधी के जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले हजार किलोमीटर की पद और यदा-कदा वाहन यात्रा करके अपनी बात कहने आए कुल-जमा डेढ़ सौ लद्दाखियों को देश की राजधानी की सीमा पर रोकने की आखिर क्या वजह हो सकती…

रांची में तीस हस्तियां अनुपम मिश्र राष्ट्रीय पर्यावरण सेवी सम्मान से सम्‍मानित

लोकशक्ति को जागरूक कर ही बचाया जा सकता है पर्यावरण : सम्‍मानित हस्तियों का वक्‍तव्‍य रांची, 30 सितंबर। देश को खुशहाल बनाने के लिए न सिर्फ प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण करना होगा बल्कि सामाजिक और राजनीतिक प्रदूषण से भी मुक्ति के…

क्रिएटर ने एक बहुत हसीन चीज बनाई है औरत : एम एफ़ हुसैन

जन्मदिन पर याद : बातचीत (समापन किश्त) भगवान विट्ठल(कृष्ण)और रुक्मिणी के पवित्र तीर्थस्थल पंढरपुर ( जिसे दक्षिण काशी भी कहते हैं) में 1915 में जन्म लेकर ईसाइयों के मुल्क इंग्लैंड के शहर लंदन में अंतिम सांस लेने वाले हुसैन साहब…

भारत के कल्चर का एसेंस है सेलिब्रेशन : एम एफ़ हुसैन

जन्मदिन पर याद : बातचीत भाग -2 हुसैन साहब से जब बात करते हैं तो वे लगने ही नहीं देते हैं कि आप दुनिया के किसी बहुत बड़े पेंटर से मुखातिब हैं ! ऐसा महसूस कराते हैं जैसे किसी पहुँचे…

ज़िंदगी में ऐसा मौक़ा नहीं आया कि डर गया हूँ : एम एफ़ हुसैन

आधुनिक कला गुरुओं की श्रेणी में, एक नाम जो बीसवीं सदी की भारतीय कला का पर्याय है, वह है एम.एफ. हुसैन का। उन्होंने आधुनिक भारतीय कला के लिए एक धर्मनिरपेक्ष भाषा की कल्पना की, जिसने भारत की ‘सामंजस्यपूर्ण संस्कृति’ को…

98 वर्षीय प्रोफेसर डॉ. बालकृष्ण निलोसे अनुशासनप्रियता, सिद्धांत और प्रकृति प्रेम के प्रतीक थे

इंदौर, 12 सितंबर। होलकर कालेज, इंदौर के पूर्व प्राचार्य, प्रोफेसर डॉ. बालकृष्ण निलोसे का आज दोपहर में निधन हो गया। वे 98 वर्ष के थे। उन्‍होंने देहदान की हुई है। डॉ. निलोसे एक असाधारण शिक्षक, वैज्ञानिक और समाजसेवी थे।उनकी गांधी विचार…

पवनार आश्रम से ‘जय जगत’ पुकार रहा है विनोबा

विनायक नरहरि भावे यानी विनोबा भावे (11सितंबर 1895-15 नवंबर 1982) की आज 129 वीं जयंती है। आज विनोबा न सिर्फ इसलिए प्रासंगिक हैं कि वे हिंदू धर्म ही नहीं, इस्लाम, ईसाई और अन्य धर्मों के उदार और अप्रतिम व्याख्याकार हैं…