Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Month: April 2022

कर्ज़ के जाल में फंसे श्रीलंका : हमारा पैसा हमारा हिसाब

कर्ज़ के जाल में फंसे श्री लंका से हम क्या सीख सकते हैं? कोविड महामारी और यूक्रेन युद्ध के बाद, कई देशों की कर्ज़ की स्तिथि काफी खराब है। क्या मौजूदा आर्थिक ढांचे को बदलने का समय आ गया है?…

यादें : देश के कालजयी हिंदी संपादक और चिंतक राजेंद्र माथुर

31 वीं पुण्‍यतिथि वह राजेंद्र माथुर का पहला तार था। छतरपुर जैसे छोटे से कस्बे में किसी नौजवान पत्रकार को नईदुनिया के प्रधान सम्पादक का तार। साइकिल उठाकर पूरे शहर के परिचितों को दिखाता फिरा | वो 1977 के चुनाव…

राजेंद्र माथुर को याद करना ज़रूरी हो गया है!

पुण्‍य स्‍मरण : नौ अप्रैल पत्रकारिता जब वैचारिक रूप से अपनी विपन्नता के सबसे खराब दौर से गुज़र रही हो ,संवाद-वाहकों ने खबरों के सरकारी स्टॉक एक्सचेंजों के लायसेन्सी दलालों के तौर पर मैदान सम्भाल लिए हों, मीडिया पर सेंसरशिप…

खगोलीय घटना : अंतरिक्ष कचरे से बढ़ता खतरा

पृथ्वी पर चौबीस घंटे उल्का पिंड गिरते रहते हैं लेकिन उनका आकार बड़ा नहीं होता। पिछले सप्‍ताह मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ में हुए मेटोर शॉवर समूह में था, जो आकाश में दिखाई दिया। उल्कापिंड पुच्छल तारे के रूप में होते है।…

समाज : दंगों की दास्तान

जातियों, धर्मों, लिंगों और वर्गों में विभाजित हमारे समाज में क्या दंगे यूं ही, बे-वजह या तात्कालिक वजहों से हो जाते हैं? या फिर कईयों के सतत प्रयासों, कारनामों से इन्हें अंजाम दिया जाता है? क्या आपस की मारामार में…

भारी उद्योग क्षेत्र के कार्बन रहित भविष्य पर हो रहा है मनन

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के अंतरसरकारी पैनल, IPCC, की ताज़ा रिपोर्ट  जब जारी हो रही थी, उसी दौरान, जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक और वैश्विक पहल आगे कदम बढ़ा रही थी। दरअसल वैश्विक स्तर पर उद्योगों को कार्बन रहित बनाने के…

‘कश्मीर फाईल्स’ और भारतीय सिनेमा

भरपूर मुनाफे के साथ-साथ देशभर में बवाल काट रही फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ ने हमारे सिनेमा को भी एक खास मुकाम तक पहुंचा दिया है। कल तक, जहां इस तरह की लगभग हरेक फिल्म में, भले ही कहने भर को, किसी…

दुनिया बचाने का मौक़ा: अगले 8 साल में आधे करने होंगे उत्सर्जन

दुनिया के अमीर 10% लोग दुनिया के कुल उत्सर्जन के आधे के लिए जिम्मेदार पृथ्वी के बीते 2000 सालों के इतिहास कि तुलना में अब, बीते कुछ दशकों में, धरती का तापमान बेहद तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके पीछे साफ़ तौर पर, इन्सानी गतिविधियों की वजह…

गाँधी की गहराई

इतिहास के इस दौर में गांधी और उनके विचार सर्वाधिक आलोचना और समीक्षा झेल रहे हैं। शायद यह इसलिए भी है कि आज दुनियाभर को गांधी को अनदेखा कर पाना कठिन हो गया है। बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में दुनिया…