Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Month: October 2021

मौजूदा राजनीति से असहमत गांधी

स्वराज के लिए गांधीजी राजनीतिक आजादी के साथ-साथ सामाजिक, नैतिक और आर्थिक आजादी आवश्यक मानते थे। लोकशाही की स्थापना के लिए सैनिक सत्ता पर नागरिक सत्ता की प्रधानता की लड़ाई वे अनिवार्य मानते थे। दरअसल आज सत्ता का आधार दंड…

अफगानिस्तान : तेल की तलब से पनपता आतंकवाद

तेल की अपनी हवस की खातिर इराक में ‘नरसंहार के हथियारों’ की फर्जी अफवाह फैलाकर जिस तरह अमरीका की अगुआई में एक समूचे राष्ट्र को नेस्त-नाबूद किया गया, हाल में अफगानिस्तान से अमरीकी सेना की वापसी की कहानी भी उससे…

कमाल की कमला भसीन

दुनिया-जहान में महिला अधिकारों की मुखर पैरोकार की हैसियत से जानी-पहचानी गईं कमला भसीन पिछले सप्ताह(25’ सितंबर ‘21) हमसे सदा के लिए विदा हो गईं हैं। उनके लंबे, संघर्षपूर्ण जीवन और काम-काज के बारे में लिखना यूं तो कठिन है,…

अहिंसक निर्भयता का कैसा स्वर्णिम संदेश दुनिया को मिला

एस.एन सुब्बराव महात्मा गांधी को ऐसे जियें अमेरिका के चुने अच्छे लोग भारत में राजदूत बनकर आए। उनमें से एक बुद्धिजीवी थे – चेस्टर बौल्स। जिन्होंने भारत को लेकर एक सुंदर किताब लिखी,  उनकी बेटी ने भी एक किताब लिखी।…

प्रतिमा और पूजा-पाठ तक सीमित गांधी

हमारे समाज की चालाकी है कि वह अपना मार्ग-दर्शन और समीक्षा करने वालों का,भगवानजी से लगाकर महापुरुष तक के दर्जे का महिमामंडन करके, किनारे कर देता है। अपने जीवन को अपना संदेश बताने वाले महात्मा गांधी भी इस कारनामे की…

महात्मा गांधी बूढ़े होते दिख रहे हैं या जवान?

महात्मा गांधी अपनी मृत्यु के बाद और भी युवा होते जा रहे हैं। युवा अवस्था महज शरीर में तेजी से दौड़ने वाले हार्मोन को नहीं कहते। वह विचारों का ऐसा केमिकल लोचा है जो खत्म होने का नाम ही नहीं…

शांति, अशांति,विचार और विचारधारा की बुनियाद

विचार और वस्तु के बीच का सदियों पुराना द्वंद्व क्या साम्प्रदायिक और गैर-साम्प्रदायिक भी हो सकता है? क्या विचार पर विचारधारा की अहमियत एक तरह की साम्प्रदायिकता को जन्म देती है? और क्या अपने चतुर्दिक फैले व्यापक संसार में शांति…

समस्याओं के हल के लिए ‘हिन्द स्वराज’

अपने समाज, देश और दुनिया के मौजूदा संकटों के निवारण के लिए महात्मा गांधी से पूछा जाता तो वे संभवत: इंग्लेंड और दक्षिण-अफ्रीका के बीच की जहाज-यात्रा के दौरान करीब 112 साल पहले लिखी अपनी किताब ‘हिन्द स्वराज’ के पन्ने…

शांति और अहिंसा की तलाश में शांति पदयात्रा आदर्श समाज रचना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

कुरूक्षेत्र से होते हुए शांति पदयात्रा कल पहुंचेगी गांधी समाधि राजघाट आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर विश्व शांति दिवस 21 सितंबर से विश्व अहिंसा दिवस 2 अक्‍टूबर तक चलने वाली पदयात्रा का आंरभ सदाचार स्थल, ब्रह्म सरोवर, कुरुक्षेत्र…

कमला भसीन : “तू बोलेगी, मुंह खोलेगी, तब ही तो जमाना बदलेगा”

कमला भसीन  : स्‍मृति शेष अपने आसपास कुछ व्यक्तित्व ऐसे रहते हैं जो जीवन के कई पाठ सिखाते चलते हैं। वे स्वयं एक किताब होते हैं। ऐसी किताब जिसके हर पृष्ठ पर जीवन की आशाएं, उमंग, कामयाबी और बहनापा हो।…