ग्रामीण प्रौद्योगिकी के पुरोधा देवेंद्र भाई गुप्ता की जन्मशताब्दी वर्ष पर दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट नई दिल्ली,31 अगस्त। ‘डॉ. देवेन्द्र कुमार गुप्ता जमीन से जुड़े सच्चे गांधीवादी वैज्ञानिक थे। जिनसे हमेशा प्रेरणा मिलती रहती थी…
डॉ. देवेंद्र कुमार गुप्ता ने विज्ञान को गांव की मिट्टी, समाज और सेवा से जोड़ा। गांधी, विनोबा और ठक्कर बापा की प्रेरणा से उन्होंने ऐसी तकनीकें विकसित कीं, जो गरीबों, महिलाओं और किसानों की गरिमा बढ़ाने वाली थीं। जन्मशताब्दी वर्ष…
6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर मानवता ने विज्ञान के सबसे क्रूर प्रयोग का साक्षी बनाया। यह सिर्फ एक शहर की तबाही नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सहअस्तित्व की अवधारणा पर गहरा घाव था। ‘हिरोशिमा दिवस’ आज…
सन् 2010 में, ‘संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन’ की डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार को डांवाडोल करने वाला परमाणु ऊर्जा कानून लाया गया था। अमरीका की औद्योगिक जमात के उकसावे पर बनाया गया यह कानून दुर्घटना होने पर उसकी समूची जिम्मेदारी से…
आधुनिक विज्ञान को लेकर एक विचित्र सी मान्यता है कि उसे आसानी से, बोलचाल की भाषा में समझा-समझाया नहीं जा सकता। नतीजे में विज्ञान आम समाज में रूढ-से-रूढतर और कई बार अंधविश्वास तक होता जाता है। विज्ञान को आसान बनाने…
हाल के कुछ दशकों में संवाद और संप्रेषण पर पूरी तरह छा चुका डिजिटल मीडिया हमारे आमफहम जीवन में कैसे दखल करता है? तेजी से बदलते, नित-नया होते इस अत्याधुनिक कारनामे ने हमें किस तरह लाभ पहुंचाया है? तेजी से बढ़ती…
हाल में एलॉन मस्क की ‘ग्रोक एआई’ की ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ उर्फ ‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ ने दुनियाभर में बवाल खड़ा कर दिया है। कोई भी ‘ग्रोक’ से किसी भी तरह का सवाल करके जवाब प्राप्त कर लेता है, लेकिन क्या ये जवाब…
अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों बाद धरती पर लौट आई हैं। वे केवल आठ दिनों के लिए अंतरिक्ष गई थीं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी वापसी टलती रही। उनकी सुरक्षित वापसी ने दुनिया को राहत की सांस लेने…
सुनील कुमार बिजली के निजीकरण की ताजा तरकीब है, स्मार्ट-मीटर। इसमें ठीक मोबाइल फोन की तरह जरूरत-भर बिजली को रीचार्ज करके उपयोग किया जाएगा। कहा जा रहा है कि इससे बिजली की चोरी रोकी जा सकेगी, लेकिन क्या यह तरकीब…
वीजू कृष्णन रोटी, कपडा और मकान की तरह बिजली भी जीवन की बुनियादी जरूरत बन गई है। जाहिर है, इन चारों अपरिहार्य उपादानों ने सेठों को अकूत पूंजी कूटने के भरपूर अवसर दिए हैं। बिजली क्षेत्र में सरकारें, तरह-तरह के…