सदैव आकर्षण का केन्द्र रहा है खूबसूरत लाल ग्रह
रात के आकाश में टिमटिमाते तारों के बीच एक लाल चमकता ग्रह सदियों से मानव जिज्ञासा का केंद्र रहा है—मंगल। इसी रहस्यमय ‘रेड प्लेनेट’ को जानने और मेरिनर-4 के ऐतिहासिक प्रक्षेपण को याद करने के लिए हर वर्ष 28 नवंबर…
विश्वास से परिवर्तन की ओर भविष्य को गढ़ता विज्ञान
हर वर्ष 10 नवंबर को मनाया जाने वाला ‘शांति एवं विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस’ हमें याद दिलाता है कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान विज्ञान की प्रगति और समाज के विश्वास पर आधारित है। यूनेस्को की इस वर्ष…
मारिया कोरिना माचाडो : आलू के बोरे से बदतर हुआ, शांति का नोबेल
वर्ष 1964 में साहित्य के नोबेल को ठुकराते हुए ज्यां पॉल सात्र ने तो उसे ‘आलू के बोरे’ का दर्जा दिया था, लेकिन छह दशक बाद 2025 में वेनेजुएला की जिन मारिया कोरिना माचाडो को शांति का नोबेल दिया गया…
‘चिप’ का चमत्कार : सेमीकंडक्टर में स्वावलंबी होता भारत
यह विज्ञान का चमत्कार ही है कि आधुनिक जीवन की अधिकांश सुविधाएं एक मामूली-सी ‘सेमीकंडक्टर चिप’ में समाहित हो गई हैं। आज की दुनिया में इसी ‘चिप’ को हासिल करने, बनाने की होड मची है। अपना देश भी इस दिशा…
ग्रामीण जीवन को समृद्ध बनाने में देवेंद्र कुमार गुप्ता के प्रौद्योगिकी प्रयोग आज भी उतने ही प्रासंगिक है : पद्मविभूषण चंडी प्रसाद भट्ट
ग्रामीण प्रौद्योगिकी के पुरोधा देवेंद्र भाई गुप्ता की जन्मशताब्दी वर्ष पर दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट नई दिल्ली,31 अगस्त। ‘डॉ. देवेन्द्र कुमार गुप्ता जमीन से जुड़े सच्चे गांधीवादी वैज्ञानिक थे। जिनसे हमेशा प्रेरणा मिलती रहती थी…
डॉ. देवेंद्र कुमार गुप्ता : गांधीवादी विचार को ग्रामीण प्रौद्योगिकी से जोड़ने वाले प्रयोगधर्मी
डॉ. देवेंद्र कुमार गुप्ता ने विज्ञान को गांव की मिट्टी, समाज और सेवा से जोड़ा। गांधी, विनोबा और ठक्कर बापा की प्रेरणा से उन्होंने ऐसी तकनीकें विकसित कीं, जो गरीबों, महिलाओं और किसानों की गरिमा बढ़ाने वाली थीं। जन्मशताब्दी वर्ष…
हिरोशिमा की राख से उठते सवाल
6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर मानवता ने विज्ञान के सबसे क्रूर प्रयोग का साक्षी बनाया। यह सिर्फ एक शहर की तबाही नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सहअस्तित्व की अवधारणा पर गहरा घाव था। ‘हिरोशिमा दिवस’ आज…
Nuclear energy : पूंजी को परोसी जाती परमाणु ऊर्जा
सन् 2010 में, ‘संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन’ की डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार को डांवाडोल करने वाला परमाणु ऊर्जा कानून लाया गया था। अमरीका की औद्योगिक जमात के उकसावे पर बनाया गया यह कानून दुर्घटना होने पर उसकी समूची जिम्मेदारी से…
बातचीत में विज्ञान बताने वाले – जयंत नार्लीकर
आधुनिक विज्ञान को लेकर एक विचित्र सी मान्यता है कि उसे आसानी से, बोलचाल की भाषा में समझा-समझाया नहीं जा सकता। नतीजे में विज्ञान आम समाज में रूढ-से-रूढतर और कई बार अंधविश्वास तक होता जाता है। विज्ञान को आसान बनाने…
डिजिटल मीडिया : अनछुए मसलों को उजागर करने का तंत्र
हाल के कुछ दशकों में संवाद और संप्रेषण पर पूरी तरह छा चुका डिजिटल मीडिया हमारे आमफहम जीवन में कैसे दखल करता है? तेजी से बदलते, नित-नया होते इस अत्याधुनिक कारनामे ने हमें किस तरह लाभ पहुंचाया है? तेजी से बढ़ती…








